‘उन्नत भट्टी’ से बड़ी इलायची की रंगत और सुवास में सुधार

'Improved Bhattis' designed by Indian Cardamom Research Institute (ICRI)सिक्किम के डोजिंग क्षेत्र के किसान यहां की प्रमुख नकदी फसल बड़ी इलायची के उपचार के लिए 'स्थानीय भट्टी' का प्रयोग काफी समय से करते हैं। किन्तु इन्हें इस प्रमुख मसाला फसल की अच्छी रंगत और सुवास नहीं मिल पाती थी। भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान (आईसीआरआई) द्वारा अब इसके लिए 'उन्नत भट्टी' का डिजाइन तैयार किया गया है।

भा.कृ.अनु.प. की एनएआईपी आजीविका परियोजना के तहत चयनित लाभार्थियों को ये उन्नत भट्टियां दी गयी। ये भट्टियां आईसीआरआई, मसाला बोर्ड, तडोंग द्वारा दिये गये डिजाइन के अनुसार तैयार की गयी। प्रत्येक भट्टी में एक समय में 400 कि.ग्रा. ताजा इलायची का उपचार किया जा सकता है। उन्नत भट्टी में उपचारित, बड़ी इलायची में बेहतर रंगत और सुवास होने से बाजार में इसका मूल्य बढ़ गया। ये उन्नत भट्टियां किसानों के कल्याण के लिए स्थानीय स्वयं सहायता समूहों और सिक्किम राज्य में कार्यरत गैर-सरकारी संगठनों को प्रदान की गयी।

स्थानीय किसानों ने कहा कि ''यदि बुनियादी और विपणन संबंधी अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाये, तो हमारी इलायची अपने बेहतर रंग, सुवास और स्वाद के कारण विदेशों में निर्यात की जा सकती है और इसके अधिक दाम मिलेंगें।'' आईसीआरआई की उन्नत भट्टियां परियोजना स्थल पर दीर्घावधि संसाधन के रूप में बनायी गयी हैं। अन्य कृषि उत्पादों के साथ बड़ी इलायची के विपणन के लिए उत्तर-पूर्वी क्षेत्रीय कृषि विपणन कार्पोरेशन लिमिटेड के साथ संबंधित करने से स्थानीय किसानों को अधिक लाभ प्राप्त हो सका। प्रौद्योगिकी सहायता की योजना इस तरह बनाई जाती है कि प्रायोजना की समाप्ति के पश्चात भी टिकाऊ विकास बना रहे।

अच्छी आमदनी के कारण अब किसानों ने वैज्ञानिक रूप से इलायची की खेती शुरू कर दी है। वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है। अब बड़ी इलायची की अच्छी गुणवत्ता रोपण सामग्री के लिए नर्सरियों की स्थापना की जा रही है। मसाला बोर्ड, विकास विभागों और नरेगा के सहयोग से स्थापित बहुगुणन इकाइयों द्वारा उच्च गुणवत्ता की पौध का उत्पादन किया जा रहा है। रोपण सामग्री का घेरलू उपयोग के साथ विपणन किया जाता है। उन्नत भट्टियों द्वारा इलायची उत्पादन को लाभकारी बनाकर किसानों को अच्छी आजीविका सुनिश्चित कर दी गयी है।

(स्रोतः एनएआईपी, मास मीडिया परियोजना, डीकेएमए, सहयोगी भागीदार आईसीएआर-आरसी-एनईएच, बारापानी)