सिक्किम में वनराज मुर्गी पालन से आदिवासियों की आजीविका सुरक्षा

सिक्किम में घर के पिछवाड़े (बैकयार्ड पोलट्री) में मुर्गीपालन बहुत लोकप्रिय है। महिलाएं, कृषक आमदनी और आजीविका सुरक्षा के लिए ये कार्य करता है। पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र के लिए भाकृअनुप अनुसंधान परिसर, सिक्किम केन्द्र, ताडोंग द्वारा कुक्कुट अनुसंधान निदेशालय, हैदराबाद की बीज अनुसंधान प्रायोजना की आदिवासी उपप्रायोजना के तहत यहां दुकाजी उन्नत किस्म ‘वनराज’ किसानों को मुर्गीपालन के लिए दी गयी। सिक्किम किसानों द्वारा नियंत्रित आहार और सीमित प्रबंधन क्रियाओं के लिए ‘वनराज’ बेहतर किस्म साबित हुई है। देसी मुर्गियों की तुलना में इसमें तेजी से विकास होता है और इसमें अंडा उत्पादन क्षमता भी अधिक है, जिससे यहां के कृषक समुदाय की आय में वृद्धि हुई है। बहुरंगी पंखों के कारण ‘वनराज’ मुर्गियां देसी मुर्गियों की तरह दिखती हैं परन्तु इसके मांस तथा अंडे की कीमत अधिक है।

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इस राज्य में अपनाये गये गांवों के स्वयं सहायता समूहों से श्रेष्ठ मुर्गी पालकों की पहचान प्रथम पंक्ति लाभार्थी के रूप में की गयी। इस योजना में लेपचा, भूटिया, तमांग और लिम्बू आदिवासियों को शामिल किया गया है। इस संस्थान द्वारा ‘बैकयार्ड पोलट्री’ पर विशेष रूप से महिलाओं के लिए कई प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। वर्ष 2014-15 के दौरान इस कार्यक्रम के तहत सिक्किम राज्य के चारों जिलों में 13,00 लाभार्थियों को 27,000 से अधिक वनराज मुर्गियां वितरित की गयीं । इन मुर्गियों के लिए समय-समय पर टीकारण और उपचार की व्यवस्था भी की गयी। स्थानीय की तुलना में इन उन्नत मुर्गियों ने निम्न मानदंडों पर बेहतर प्रदर्शन किया- 3 महीने में नर पक्षी का औसत भार (2.4 कि.ग्रा.), 3 महीने में मादा पक्षी का औसत भार (1.7 कि.ग्रा.), पहली बार अंडा देने पर औसत आयु (150-155 दिन), औसत अंडा उत्पादन (150-170 प्रति वर्ष) और लाभ; लागत अनुपात (1.93)। इस संस्थान ने पूर्वी सिक्किम जिले के तिम्पीयम क्षेत्र में बैकयार्ड पोलट्री के लिए एक माॅडल गांव का विकास किया है। लगभग 1600 मुर्गियां 35 किसानों और तिम्पीयम किसान समृद्धि समूह को वितरित की गयी हैं। अब तिम्पीयम गांव उन्नत किस्म के मुर्गीपालन उत्पादन के लिए काफी लोकप्रिय हो गया है और अब आसपास के गांवों के ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए यह आदर्श मॉडल बन गया है। सतत् आजीविका सुरक्षा के लिए कृषि-उद्यम विकसित करने में उन्नत मुर्गीपालन अब पूरे राज्य में लोकप्रिय बनता जा रहा है। वनराज मुर्गीपालन के जरिए पूरे राज्य के कृषक समुदाय की आजीविका सुधारने में पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र के लिए भाकृअनुप अनुसंधान परिसर, सिक्किम केन्द्र, ताडोंग की भूमिका महत्वपूर्ण है।

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(स्रोत: भाकृअनुप सिक्किम केन्द्र, ताडोंग, सिक्किम)