अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (सब्जी फसल) की समूहिक बैठक

10-13 मई, 2016, नई दिल्ली

Group Meeting of All India Coordinated Research Project (Vegetable Crops) Organized अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (सब्जी फसलें) की 34वीं समूह बैठक का उद्घाटन डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर और महानिदेशक, भाकृअनुप द्वारा 10 मई, 2016 को नई दिल्ली में किया गया। डॉ. त्रिलोचन महामात्र ने अपने अभिभाषण में सब्जी फसल के वैज्ञानिकों से कहा कि वे उत्पादकों और उपभोक्ताओं की चुनौतियों का समाधान कर उनकी आकांक्षाओं को पूरा करें।

उन्होंने वैज्ञानिकों को सुझाव दिया कि वे किसानों की उत्पादकता व उत्पादन तथा आमदनी बढ़ाने के विकल्प ढूंढ़े, जिससे आम जनता की पोषण आवश्यकता और किसानों की आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही उन्होंने छह प्रकाशनों का विमोचन भी किया।

डॉ. एन.के. कृष्ण कुमार, उप महानिदेशक (बागवानी), डॉ रविंदर कौर, निदेशक भाकृअनुस, डॉ. के. वी. प्रभु, संयुक्त निदेशक अनुसंधान, भाकृअनुस और डॉ. बी. सिंह, निदेशक आईआईवीआर ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखें।

इस बैठक में 12 तकनीकी सत्र थे, जिनमें पिछले साल के तकनीकी कार्यक्रम के आधार पर चर्चा एवं परिणाम प्रस्तुत किए गए। वर्ष 2016-17 के लिए तकनीकी कार्यक्रमों को पूरे सत्र में अंतिम रूप दिया गया।

छह किस्मों (टमाटर डिटेरमिनेट ATL-8-21 आणंद कृषि विश्वविद्यालय; टमाटर इंडिटेरमिनेट VRT-1201 व VRT-1202 और तोरई VRRG -27 आईआईवीआर से, मटर चूर्णी फफूंद प्रतिरोधी आईआईएचआर -1 आईआईएचआर से) और एक टमाटर संकर इंडिटेरमिनेट कावेरी कावेरी - 304 (केटीएच-304) कावेरी बीज से जारी करने और संबंधित क्षेत्रों द्वारा अपनाने हेतु अधिसूचना के लिए चिन्हित किया गया।

सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले एआईसीआरपी (वीसी) के समन्वय केंद्र, सब्जी विज्ञान प्रभाग, भाकृअनुसं, नई दिल्ली को स्वर्गीय अमित सिंह मेमोरियल अवार्ड –2015 प्रदान किया गया। प्याज और लहसुन पर सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता के लिए एनएचआरडीएफ पुरस्कार डॉ. के.ई. लवांडे, पूर्व कुलपति, डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ, ढपोली को दिया गया।

डॉ. मेजर सिंह, परियोजना समन्वयक ने वर्ष 2015-16 के लिए एआईसीआरपी (वीसी) की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट पेश की।

सार्वजनिक (राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और भाकृअनुप) और निजी संस्थाओं (बीज कंपनियों) से 300 से अधिक सब्जी वैज्ञानिकों ने बैठक में भाग लिया।

(स्रोत: सब्जी विज्ञान विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली)