उत्तर-पूर्वी कृषि जलवायु जोन की कार्यशाला का आयोजन

North Eastern Agro-climatic Zone Workshop held पूर्वी हिमालयन क्षेत्र में कृषि विकास के लिए रोडमैप विकसित करना विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन दिनांक 29 सितम्‍बर, 2015 को उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र के लिए भाकृअनुप का अनुसंधान परिसर, मेघालय तथा भाकृअनुप – अटारी, जोन-3, उमियम, मेघालय द्वारा किया गया।

डॉ. एन.एस. राठौर, उपमहानिदेशक (शिक्षा), भाकृअनुप तथा कार्यक्रम के अध्‍यक्ष ने अंतर विषयी दृष्टिकोण पर आधारित उपयुक्‍त प्रौद्योगिकीय हस्‍तक्षेपों के माध्‍यम से क्षेत्र के कृषि उत्‍पादन और उत्‍पादकता में टिकाऊ सुधार लाने के लिए उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र के किसानों से जुड़े सभी प्रासंगिक मुद्दों पर बल दिया। इन्‍होंने उच्‍च मूल्‍य वाली फसलों/सगंधीय एवं औषधीय पौधों के उत्‍पादन; कटाई उपरांत नुकसान में कमी; उत्‍पादन की लागत और श्रम दक्षता; आसानी से उपलब्‍ध पारम्‍परिक एवं अल्‍प दोहित फलों का अत्‍यधिक दोहन; कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम; प्राकृतिक एवं देसी संसाधनों का स्‍मार्ट प्रबंधन; नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का संयोजन; तथा सार्वजनिक – निजी भागीदारी आदि पर विशेष बल दिया जिससे पूर्वी हिमालयन क्षेत्र की पोषणिक सुरक्षा को बढ़ावा मिल सकता है।

डॉ. एस.वी. नचान, निदेशक, उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र के लिए भाकृअनुप का अनुसंधान परिसर, उमियाम केन्‍द्र, मेघालय ने अपने स्‍वागत संबोधन में पूर्वी हिमालयन क्षेत्र में सेकेण्‍डरी कृषि की महत्‍ता पर प्रकाश डाला और उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र को न केवल खाद्यान्‍न उत्‍पादन में आत्‍मनिर्भर बनाने वरन् इस क्षेत्र में कृषि विकास के लिए एक रोडमैप के रूप में रणनीतियों की प्रणालीगत प्राथमिकताओं के माध्‍यम से अन्‍य पड़ोसी देशों को खाद्यान्‍न की आपूर्ति करने में समर्थ बनाने का भरोसा जताया।

कार्यशाला की सह-अध्‍यक्षता डॉ. पी.एस. पाण्‍डेय, सहायक महानिदेशक (शिक्षा योजना एवं एचएस) तथा डॉ. जितेन्‍द्र चौहान, कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री, भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार द्वारा की गई।

इसके अलावा विशेषज्ञता के विभिन्‍न क्षेत्रों से प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने चर्चा में भाग लिया और उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र के किसानों तक विशिष्‍ट प्रौद्योगिकीय सहयोग, प्रसार तथा प्रदर्शन सेवाओं को बढ़ाने हेतु विभिन्‍न सेक्‍टरों में नीति योजना से जुड़े महत्‍वपूर्ण बिन्‍दुओं पर प्रकाश डाला।

(स्रोत : उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र के लिए भाकृअनुप का अनुसंधान परिसर, उमियम केन्‍द्र, मेघालय)