जनजातीय किसानों के लिए शूकर पालन परियोजना

27 सितंबर, 2016, येवांग, अरूणाचल प्रदेश

Pig rearing programme for Tribal Farmersभाकृनुप – राष्ट्रीय याक अनुसंधान केन्द्र, पश्चिमी केमांग और भाकृअनुप – भारतीय डेरी अनुसंधान संस्थान, कल्याणी द्वारा संयुक्त रूप से जनजातीय किसानों को शूकर पालन पर एक दिवसीय कार्यक्रम येवांग गांव, पश्चिम केमांग में 17 सितंबर को आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शूकर पालन द्वारा आर्थिक लाभ के बारे में जानकारी प्रदान करना और मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम के तहत शूकरों के लिए पारंपरिक एवं गैर-पारंपरिक चारे के उपयोग के बारे में बताना था।

डॉ. एस. एम. देब, निदेशक, भाकृअनुप – राष्ट्रीय याक अनुसंधान केन्द्र ने जनजातीय समुदाय के आर्थिक विकास से संबंधित मुद्दों, शूकर पालन के महत्व और टीपीएस के महत्व के के बारे में चर्चा की।

लाभकारी शूकर पालन को बढ़ावा देने के लिए 30 किसानों को स्थानीय संसाधनों की सहायता से शूकर पालन बाड़ा बनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया। प्रत्येक किसान को प्रजनन के लिए 5 शूकर शिशु (4 मादा व 1 नर), पशुओं के उचित विकास के लिए राशन तथा स्वास्थ के लिए विटामिन, पूरक व बाड़े के लिए तारपोलिन प्रदान किए गए।.

(स्रोतः भाकृअनुप – राष्ट्रीय याक अनुसंधान केन्द्र, पश्चिमी केमांग)