पशु उत्पादकता एवं देखभाल पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला

1 दिसंबर, 2016, नई दिल्ली

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं द यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के संयुक्त प्रयास से पशु उत्पादकता एवं देखभाल तथा अनुसंधान पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (एनएएससी), नई दिल्ली में 1-2 दिसंबर, 2016 को किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य भाकृअनुप एवं एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के बीच पशु उत्पादकता, देखभाल, पशुपालन शिक्षा तथा अनुसंधान पर विचारों एवं अनुभवों को साझा करना था। इसी क्रम में दोनों संस्थानों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि भारत में पशुपालन, संरक्षण एवं देखभाल की स्वस्थ परंपरा रही है जिसका वर्णन सदियों पुराने सांस्कृतिक दस्तावेजों में उपलब्ध है। डॉ. महापात्र ने पशुओं के स्वास्थ्य, देखभाल, वैज्ञानिक तौर-तरीके से पशुपालन, पोषण, तनाव, शारीरिक विकास आदि पर केन्द्रित अनुसंधान पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत में पशुपालन में साफ-सफाई से संबंधित जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है जिससे पशु जनित बीमारियों को फैलने से रोका जा सके। उन्होंने पशुपालन की वर्तमान स्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पशुपालन प्रशिक्षण व शिक्षण द्वारा हितधारकों को जागरूक करने की आवश्यकता है जिससे बढ़ती हुई आबादी की संबंधित आवश्यकताओं को संतुलित किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने यह आशा व्यक्त की कि इस कार्यशाला से पशुपालन की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए अनुसंधान, विचार, अनुभवों तथा नीतियों के स्तर पर अनुशंसाएं प्राप्त होंगी।

प्रो. कैथी डायर, डायरेक्टर, जिन एंड मार्चिंग इंटरनेशनल सेन्टर फॉर एनिमल वेलफेयर, एजुकेशन, यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग (यू.के.) ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए पशु संरक्षण, देखभाल, पोषण तथा वैज्ञानिक पालन विधियां बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस कार्यशाला के दौरान एडिनबर्ग विश्वविद्यालय तथा भाकृअनुप के पशुपालन संबंधित अनुभवों, विचारों तथा तकनीकों को साझा करने को नया आयाम मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने देसी नस्ल के पशुओं के आनुवांशिक चयन को महत्वपूर्ण बताया जिस पर संयुक्त रूप से कार्य करने की आवश्यकता है।  

डॉ. एच. रहमान, उपमहानिदेशक (पशु विज्ञान) भाकृअनुप ने अपने संबोधन में कहा कि पशु पालन एवं पशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में भाकृअनुप विभिन्न संस्थानों के साथ संयुक्त रूप से कार्य कर रही है। इसके साथ ही अनुसंधान बिन्दुओं जैसे पशु प्रजनन, पोषण, बीमारियों तथा पशु जनित रोगों, आनुवांशिकी, प्रबंधन, पशु रोग निगरानी तथा निदान आदि पर गहनता से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने पशुपालन तथा पशुधन के क्षेत्र में तीन आर (R) पर बल दिया जो प्रतिस्थापन (रिप्लेस) – परंपरागत प्रौद्योगिकी के स्थान पर उन्नत प्रौद्योगिकियों का प्रयोग, घटाना (रिडक्शन)- पशुपालन में बीमारियों या जलवायु से संबंधित तनावों का घटना, संवर्धन (रिफाइनमेंट)- आनुवंशिक व प्रौद्योगिकी सुधार पर केन्द्रित हैं।  

डॉ. क्रिस्टोफर टुफनेल, अध्यक्ष, रॉयल कॉलेज ऑफ वेटेनरी सर्जन्स (यू.के.) ने अपने संबोधन में कहा कि शल्यचिकित्सा, विशेषज्ञता, नियम-कानून, प्रौद्योगिकी संवर्धन, पशुचिकित्सा शिक्षण, आदानों से संबंधित अनुभवों को साझा करने की आवश्यकता है जिससे पशुधन से संबंधित लाभ को बढ़ाया जा सके।

डॉ. आर.एस. गांधी, सहायक महानिदेशक (एपी एंड बी) ने उद्घाटन सत्र के अंत में धन्यवाद ज्ञापन दिया।

कार्यशाला में विभिन्न देशों तथा भाकृअनुप के पशुपालन से संबंधित संस्थानों के निदेशकगणों तथा वैज्ञानिकों ने भाग लिया। 

(स्रोतः हिन्दी संपादकीय एकक, भाकृअनुप- डीकेएमए, नई दिल्ली)