भाकृअनुप – राष्‍ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्‍द्र (ICAR-NRCM), नागालैण्‍ड में 'संकल्‍प से सिद्धि' कार्यक्रम का आयोजन

30 अगस्‍त, 2017, नागालैण्‍ड

वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के भारत के माननीय प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने की दिशा में 'संकल्‍प से सिद्धि' कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केन्‍द्र, फेक और भाकृअनुप – राष्‍ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्‍द्र  (ICAR-NRCM), नागालैण्‍ड द्वारा गांव पोरबा, नागालैण्‍ड में किया गया।

मुख्‍य अतिथि श्री के.जी. केन्‍ये, माननीय सांसद (राज्‍य सभा) ने कृषि विज्ञान केन्‍द्र, फेक में किसानों की आय को दोगुना करना विषय पर लगाई गई प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के उपरान्‍त पारम्‍परिक वेश-भूषा पहने ग्रामीणों और हाथों में पोस्‍टर पकड़े जीवंत युवाओं के साथ कृषि विज्ञान केन्‍द्र, फेक कैम्‍पस से पोरबा ग्राम पंचायत तक 'संकल्‍प से सिद्धि' मार्च का नेतृत्‍व किया। श्री केन्‍ये ने शपथ ग्रहण समारोह का नेतृत्‍व किया और किसानों से उन्‍नत तकनीकों और स्‍कीमों को अपनाने का अनुरोध किया। श्री के.जी. केन्‍ये ने कृषि एवं सम्‍बद्ध क्षेत्रों की ओर उच्‍च प्राथमिकता देने के लिए वर्तमान केन्‍द्र सरकार द्वारा की गई पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि अभी भी 70 प्रतिशत जनसंख्‍या का मुख्‍य व्‍यवसाय खेती-बाड़ी है। एक कृषि प्रधान राज्‍य होने के कारण नागालैण्‍ड जैविक खेती को अपनाकर नव भारत आन्‍दोलन में अपना योगदान कर सकता है। माननीय सांसद ने राज्‍य के किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए किए गए अनथक प्रयासों के लिए कृषि विज्ञान केन्‍द्र, फेक और भाकृअनुप – राष्‍ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्‍द्र  (ICAR-NRCM), नागालैण्‍ड की उपलब्धियों की सराहना की।

डॉ. आर.एस. गांधी, सहायक महानिदेशक (एपी एंड बी), भाकृअनुप, नई दिल्‍ली विशिष्‍ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थे। डॉ. गांधी ने कहा कि भले ही आज भारत खाद्यान्‍न के मामले में एक आत्‍मनिर्भर राष्‍ट्र बन गया है लेकिन अभी भी व्‍यापक फसलोत्‍तर नुकसान होता है जिसे रोकने की जरूरत है। उन्‍होंने कृषि में पशुधन और पोल्‍ट्री सेक्‍टर के योगदान और किसानों की आजीविका एवं पोषणिक सुरक्षा को बढ़ाने में इस सेक्‍टर की भूमिका की सराहना की। उन्‍होंने इस बात पर बल दिया कि पर्वतीय राज्‍यों में एक महत्‍वपूर्ण घटक होने के कारण पशुधन क्षेत्र में प्रचुर क्षमता है जिसका कि  ग्रामीण जनसंख्‍या की आय को दोगुना करने के लिए पूरी तरह से दोहन करने की जरूरत है। खेत परिस्थितियों में मिथुन एवं अन्‍य पशुधन प्रजातियों के श्रेष्‍ठ जननद्रव्‍य का प्रसार करने से निश्चित रूप से उच्‍चतर उत्‍पादकता और हितधारकों को अधिक लाभप्रदता मिलेगी।

डॉ. अभिजीत मित्रा, निदेशक, भाकृअनुप – राष्‍ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्‍द्र  (ICAR-NRCM), नागालैण्‍ड ने अतिथिगणों एवं अन्‍य प्रतिभागियों का औपचारिक रूप से स्‍वागत करते हुए किसानों की आय को दोगुना करने हेतु एक घटक के रूप में अर्ध सघनीय मिथुन पालन के महत्‍व पर बल दिया। उन्‍होंने किसानों ने स्‍टॉक के आनुवंशिक सुधार में आगे भविष्‍य में उपयोग करने के लिए स्‍वस्‍थ और ह्ष्‍ट-पुष्‍ट एवं गठीले नर सांडों को बचाकर रखने का आह्वान किया।

इस अवसर पर, 200 से भी अधिक किसान, राज्‍य सरकार एवं भारत सरकार के अधिकारीगण मौजूद थे। कार्यक्रम में संबंधित विषय पर और माननीय प्रधानमंत्री तथा माननीय केन्‍द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री के संदेशों पर एक फिल्‍म शो भी दिखाया गया। डॉ. आर.के. सिंह, अध्‍यक्ष, कृषि विज्ञान केन्‍द्र, फेक ने धन्‍यवाद ज्ञापन प्रस्‍तुत किया।