1 जून, 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (क्रिडा) भारत सरकार के आह्वान के प्रत्युत्तर में किसानों के बीच उर्वरकों के संतुलित उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने हेतु सेव द फील्ड कैंपेन 2026 (खेत_बचाओ_अभियान) का आयोजन कर रहा है। यह अभियान 01 जून से 30 जून, 2026 तक देशभर में आयोजित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत भाकृअनुप-सीआरआईडीए, हैदराबाद, ने आज तेलंगाना के महबूबनगर जिले के मिडगिल मंडल के डोनूर गांव में संतुलित उर्वरीकरण एवं मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर एक जागरूकता अभियान आयोजित किया।
मृदा परीक्षण के महत्व तथा मृदा नमूना संग्रहण एवं विश्लेषण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया। टीम ने समेकित पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक संशोधन (ऑर्गेनिक अमेंडमेंट्स) तथा जैव उर्वरकों के प्रयोग जैसी प्रमुख मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पद्धतियों पर प्रकाश डाला।

किसानों को दलहनी फसलों, हरित खाद फसलों तथा अन्य उपयुक्त फसलों को शामिल करते हुए फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। जैविक खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, हरित खाद तथा जैव उर्वरकों के लाभों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय स्थिरता में सुधार हेतु जैविक खेती, प्राकृतिक खेती तथा परिशुद्ध कृषि (प्रिसीजन एग्रीकल्चर) जैसी पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को भी बढ़ावा दिया गया।
किसानों को सतत फसल उत्पादन के लिए मृदा परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरीकरण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। उन्हें यूरिया के अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह दी गई, क्योंकि इससे मृदा स्वास्थ्य, फसल उत्पादकता तथा कृषि लाभप्रदता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
कार्यक्रम में दो महिला किसानों सहित कुल 20 किसानों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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