29 मई, 2026, आनंद, गुजरात
भाकृअनुप-औषधीय एवं सुगंधित पौधा अनुसंधान निदेशालय (डीएमएपीआर), आनंद, गुजरात, ने भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो (एनबीएआईआर), बेंगलुरु, कर्नाटक, के सहयोग से मच्छरों और घरेलू मक्खियों के प्रभावी नियंत्रण के लिए वनस्पति आधारित हर्बल फॉर्मूलेशन विकसित किया है। भाकृअनुप-डीएमएपीआर देश में औषधीय एवं सुगंधित पौधों के अनुसंधान एवं विकास के लिए कार्यरत एक राष्ट्रीय संस्थान है।
भाकृअनुप-डीएमएपीआर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप), कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। औषधीय एवं सुगंधित पौधे स्वास्थ्य और आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं, भाकृअनुप-एनबीएआईआर सतत कृषि के लिए कृषि महत्व के कीट संसाधनों के संग्रह, अभिलक्षणन, प्रलेखन, संरक्षण, आदान-प्रदान एवं उपयोग हेतु नोडल एजेंसी है।

हर्बल मच्छर एवं घरेलू मक्खी प्रतिरोधी प्रौद्योगिकी पर्यावरण-अनुकूल वाहक प्रबंधन तथा जनस्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। “मच्छरों एवं घरेलू मक्खियों के नियंत्रण के लिए वनस्पति आधारित संरचना तथा उससे संबंधित विधियां” नामक इस अभिनव प्रौद्योगिकी को भारतीय पेटेंट संख्या 588397 प्रदान किया गया है। यह पेटेंट प्राप्त फॉर्मूलेशन पूरी तरह प्राकृतिक रूप से प्राप्त पौधों के आवश्यक तेलों पर आधारित है और यह कृत्रिम रासायनिक कीटनाशकों का सुरक्षित, हर्बल, पर्यावरण-अनुकूल तथा अवशेष-मुक्त विकल्प प्रदान करता है। यह मच्छरों और घरेलू मक्खियों के वयस्क चरणों पर प्रतिरोधी प्रभाव तथा उनके लार्वा चरणों पर विषाक्त प्रभाव प्रदर्शित करता है।
हर्बल मच्छर प्रतिरोधी स्प्रे विशेष रूप से पशुओं तथा मनुष्यों दोनों को प्रभावित करने वाले कीट वाहकों के नियंत्रण और प्रबंधन के लिए विकसित किया गया है। इस फॉर्मूलेशन को लेमनग्रास, पालमारोसा, तुलसी, सिट्रोनेला और नीम जैसे महत्वपूर्ण सुगंधित पौधों से प्राप्त प्राकृतिक आवश्यक तेलों का उपयोग करके तैयार किया गया है।

इस पेटेंट प्राप्त प्रौद्योगिकी का संयुक्त रूप से विकास मुख्य डॉ. अश्विन त्रिवेदी, तकनीकी अधिकारी, भाकृअनुप-डीएमएपीआर, आनंद, डॉ. जितेन्द्र कुमार, पूर्व निदेशक भाकृअनुप-डीएमएपीआर, आनंद, गुजरात तथा डॉ. केशवन सुबाहरण, प्रधान वैज्ञानिक, भाकृअनुप-एनबीएआईआर, बेंगलुरु, कर्नाटक, द्वारा किया गया है।
इस विकास से किसानों, पशुपालकों, परिवारों तथा जनस्वास्थ्य एजेंसियों को लाभ मिलने की अपेक्षा है, क्योंकि यह मच्छरों और घरेलू मक्खियों के प्रबंधन के लिए हानिकारक रासायनिक अवशेषों के बिना एक प्रभावी हर्बल फॉर्मूलेशन उपलब्ध कराता है, जिससे सुरक्षित पर्यावरणीय एवं जनस्वास्थ्य प्रथाओं को बढ़ावा मिलेगा।
(स्रोत: भाकृअनुप-औषधीय एवं सुगंधित पौधा अनुसंधान निदेशालय, आनंद, गुजरात)







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