भाकृअनुप-एनआरसीपी, गुवाहाटी ने 25वां स्थापना दिवस का किया आयोजन

भाकृअनुप-एनआरसीपी, गुवाहाटी ने 25वां स्थापना दिवस का किया आयोजन

4 सितंबर, 2026, गुवाहाटी

भाकृअनुप–राष्ट्रीय शूकर अनुसंधान केंद्र, रानी, गुवाहाटी, ने आज अत्यंत उत्साह और गर्व के साथ अपना 25वां स्थापना दिवस मनाया, जो वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास तथा सुअर पालकों और हितधारकों की सेवा में केंद्र की यात्रा का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस समारोह में भाकृअनुप के वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व निदेशक और वैज्ञानिक, किसान, प्रगतिशील उद्यमी, संस्थागत भागीदार, मीडिया प्रतिनिधि और कर्मचारी शामिल हुए, जिन्होंने सुअर उत्पादन और संबद्ध क्षेत्रों में केंद्र के 25 वर्षों के योगदान का स्मरण किया।

कार्यक्रम में डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप), मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जिन्होंने ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया। डॉ. राघवेंद्र भट्टा, उप महानिदेशक (पशु विज्ञान), भाकृअनुप, सहित पूर्व और वर्तमान प्रतिष्ठित अधिकारी, वैज्ञानिक, भाकृअनुप संस्थानों के निदेशक, किसान और उद्यमी भी समारोह में उपस्थित रहे।

ICAR-NRCP, Guwahati Celebrates 25th Foundation Day

अपने वर्चुअल संबोधन में डॉ. जाट ने सुअर अनुसंधान में केन्द्र के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की और नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा उद्यमिता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारत को सुअर उत्पादन के क्षेत्र में अनुयायी के बजाय एक अग्रणी देश के रूप में उभरने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से नेतृत्व-आधारित प्रणाली विकसित करने के महत्व पर बल दिया।

डॉ. भट्टा ने उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए अनुसंधान के परिणामों को क्षेत्र-स्तरीय प्रौद्योगिकियों में परिवर्तित करने तथा शोधकर्ताओं, किसानों और उद्यमियों के बीच संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्वदेशी सुअर नस्लों के लक्षण-वर्णन के लिए जीनोमिक्स, परिशुद्ध पशुधन पालन और प्रजनन प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

विशिष्ट अतिथियों में डॉ. के.एम. बुर्जरबरुआ, पूर्व कुलपति, असम कृषि विश्वविद्यालय एवं असम कृषि एवं पूर्व उप महानिदेशक (पशु विज्ञान), भाकृअनुप; डॉ. निरंजन कलिता, कुलपति, पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्याल; डॉ. डी. के. शर्मा, पूर्व निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय शूकर अनुसंधान केन्द्र; डॉ. जी. कादिरवेल, निदेशक, भाकृअनुप-आरसीएनईएच; डॉ. एन.एच. मोहन, निदेशक, भाकृअनुप-एनबीएजीआर; डॉ. जी. पाटिल, निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्द्र; और डॉ. मिहिर सरकार, निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय याक अनुसंधान केन्द्र, शामिल थे, जिन्होंने ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया।

पिछले 25 वर्षों में केंद्र की यात्रा को याद करते हुए डॉ. बुर्जरबरुआ ने पूर्वोत्तर में वैज्ञानिक शूकर उत्पादन में इसके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की और निरंतर किसान-केन्द्रित अनुसंधान तथा प्रभावी प्रौद्योगिकी प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।

ICAR-NRCP, Guwahati Celebrates 25th Foundation Day

डॉ. वी.के. गुप्ता, निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय शूकर अनुसंधान केन्द्र, ने पिछले 25 वर्षों में केन्द्र की प्रमुख उपलब्धियों का अवलोकन प्रस्तुत किया और शूकर प्रजनन, पोषण, स्वास्थ्य, उत्पादन, प्रौद्योगिकी विकास तथा क्षमता निर्माण में इसके योगदान पर प्रकाश डाला।

समारोह का एक प्रमुख आकर्षण प्रगतिशील किसानों और उद्यमियों को शूकर पालन तथा मूल्यवर्धित शूकर उत्पादों में उनके योगदान के लिए सम्मानित करना रहा।

गुवाहाटी स्थित मेसर्स रॉयल पोर्क के श्री दीपज्योति दास और मेसर्स एरिलूम प्राइवेट लिमिटेड के श्री निरव मेधी को शूकर मांस और उत्पाद प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण तथा ब्रांड विकास में उनकी उद्यमशील पहलों के लिए सम्मानित किया गया।

प्रगतिशील किसानों को कृषि और शूकर पालन में उनके योगदान के लिए भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी गणमान्य व्यक्तियों, किसानों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों, कर्मचारियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया, जिनकी उपस्थिति और सहयोग ने भाकृअनुप-राष्ट्रीय शूकर अनुसंधान केन्द्र के 25वें स्थापना दिवस समारोह को एक यादगार अवसर बनाया।

रजत जयंती समारोह ने अनुसंधान उत्कृष्टता, किसान सशक्तिकरण, उद्यमिता और सतत शूकर उत्पादन के प्रति केन्द्र की प्रतिबद्धता को दोहराया, साथ ही पूर्वोत्तर भारत और उससे आगे पशुधन क्षेत्र के विकास में योगदान देने पर नए सिरे से ध्यान केन्द्रित किया।

(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय शूकर अनुसंधान केन्द्र, रानी, गुवाहाटी)

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