1 सितंबर, 2026, नई दिल्ली
भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली और आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (एएम/एनएस इंडिया) ने आज कृषि में लौह अयस्क अवशेषों (आईओटी) के सतत उपयोग पर उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कया। यह सहयोग कृषि में अपशिष्ट के मूल्यवर्धन, संसाधन संरक्षण और चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिए विज्ञान-आधारित मार्ग विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एमओयू पर डॉ. सी. विश्वनाथन, संयुक्त निदेशक (अनुसंधान), भाकृअनुप-आईएआरआई और डॉ. विश्वनाथन एन., अनुसंधान एवं विकास प्रमुख, एएम/एनएस इंडिया, ने दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए और इसका आदान-प्रदान किया।
यह सहयोग एएम/एनएस इंडिया और भाकृअनुप-आईएआरआई द्वारा 2024 में शुरू किए गए प्रारंभिक अध्ययनों पर आधारित है, जिनका उद्देश्य लौह अयस्क के परिष्करण के दौरान उत्पन्न लौह अयस्क अवशेषों के कृषि अनुप्रयोगों के लिए उनकी संभावनाओं का आकलन करना था। अध्ययनों से संकेत मिला कि IOTs में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले खनिज, जिनमें सिलिका, आयरन ऑक्साइड, एल्युमिना, कैल्शियम और मैग्नीशियम के साथ-साथ अन्य खनिज तत्व शामिल हैं, मौजूद होते हैं, जिनमें कठोर वैज्ञानिक मूल्यांकन और सुरक्षा आकलन के अधीन फसल उत्पादन और मृदा स्वास्थ्य के लिए संभावित उपयोगिता हो सकती है।
भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली और छत्तीसगढ़ के किरंदुल स्थित एएम/एनएस इंडिया की खनिज परिष्करण सुविधा के निकट किए गए प्रारंभिक प्रयोगशाला और खेत स्तरीय अध्ययनों से उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हुए हैं। अध्ययनों में धान, गेहूं और सब्जियों जैसी फसलों में खनिज पोषक तत्वों के स्रोत के रूप में उचित रूप से विश्लेषित लौह अयस्क अवशेषों के उपयोग की संभावनाओं का संकेत मिला है।

वर्तमान एमओयू के तहत, दोनों संस्थान भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली और किरंदुल में एएम/एनएस इंडिया की सुविधाओं में बहु-मौसमी, दीर्घकालिक अध्ययन करेंगे। अनुसंधान में फसल की प्रतिक्रिया, पोषक तत्वों की उपलब्धता, पादप-विषाक्तता, पोषक तत्वों की गतिशीलता, लीचिंग व्यवहार और संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का व्यापक आकलन किया जाएगा। इसका उद्देश्य ठोस वैज्ञानिक साक्ष्य तैयार करना और कृषि में लौह अयस्क अवशेषों के उपयोग के लिए सुरक्षित, लाभकारी तथा पर्यावरण की दृष्टि से जिम्मेदार मार्ग विकसित करना है।
इस पहल का उद्देश्य दीर्घकालिक भंडारण की आवश्यकता वाले खनन उप-उत्पाद को कृषि के लिए संभावित मूल्यवर्धित संसाधन में परिवर्तित करना है, साथ ही अपशिष्ट के संचय को कम करना और संसाधन दक्षता को बढ़ावा देना है। यह अनुसंधान बाहरी स्रोतों से प्राप्त खनिज इनपुट पर निर्भरता कम करने, पोषक तत्व उपयोग दक्षता में सुधार करने और सतत मृदा प्रबंधन को समर्थन देने में भी योगदान दे सकता है। विशेष रूप से, कार्यक्रम में निम्नीकृत और पोषक तत्वों की कमी वाली मृदाओं में लौह की कमी को दूर करने तथा कृषि उत्पादों में लौह की सांद्रता बढ़ाने में लौह-समृद्ध अवशेषों की संभावित भूमिका का अध्ययन किया जाएगा, जिससे फसल जैव-सुदृढ़ीकरण के लिए जारी प्रयासों को पूरक सहायता मिलेगी।
यह सहयोग एएम/एनएस इंडिया के व्यापक स्थिरता उद्देश्यों, विशेष रूप से संसाधन दक्षता, अपशिष्ट मूल्यवर्धन और चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों के अनुरूप है। कंपनी ने संसाधनों के अधिकतम उपयोग के उद्देश्य से कई पहल की हैं, जिनमें स्टील स्क्रैप का पुनर्चक्रण, स्टील स्लैग को बुनियादी ढांचा अनुप्रयोगों के लिए अपने ब्रांडेड एग्रीगेट उत्पाद “आकार” में परिवर्तित करना, जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणालियों के माध्यम से व्यापक जल पुनर्चक्रण तथा अपने परिचालन से उत्पन्न 90% से अधिक प्रक्रिया उप-उत्पादों का पुन: उपयोग या पुनर्चक्रण शामिल है।
(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)







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