एनडीआरआई में एक और मुर्राह भैंस की क्लोन कटड़ी लालिमा का जन्म

2 जून 2014, करनाल

राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई), करनाल में एक और मुर्राह भैंस की क्लोन कटड़ी 'लालिमा' का जन्म हुआ है। डॉ. ए.के. श्रीवास्तव, निदेशक, एडीआरआई में बताया कि लालिमा का जन्म 'हस्त-निर्देशित (हैंड गाइडेड) क्लोनिंग तकनीक' से 2 मई, 2014 को हुआ है। कटड़ी का जन्म सामान्य प्रसव से हुआ था और जन्म के समय इसका भार लगभग 36 किलोग्राम था। कटड़ी पूरी तरह से स्वस्थ है और वर्तमान में इसका भार 42 किलोग्राम है। यह कटड़ी एनडीआरआई के पशु फार्म की मुर्राह भैंस (एमयू-5345) की क्लोन है।

Another Clone of Adult Murrah Buffalo Lalima born at NDRIडॉ. एस. अय्यप्पन, सचिव, डेयर और महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने वैज्ञानिकों के दल को बधाई देते हुए कहा कि 'हस्त-निर्देशित क्लोनिंग तकनीक' से वयस्क मादा भैंस से क्लोन का विकास उत्कृष्ट जर्मप्लाज्म की वृद्धि में तेजी लाएगा तथा दूध की बढ़ती मांग को पूरा करने की चुनौती का सामना करने में हमारी मदद करेगा।

इस क्लोन को तैयार करने वाले वैज्ञानिकों के दल में डॉ. एस.के. सिंगला, डॉ. एम.एस. चौहान, डॉ. आर.एस. माणिक, डॉ. पी. पाल्टा, डॉ. शिव प्रसाद और डॉ. बसंती ज्योत्सना शामिल हैं। ज्ञातव्य है कि व्यावहारिक तौर पर डेयरी क्षेत्र में बेहतर जर्मप्लाज्म के तीव्र गुणन के लिये क्लोनिंग की दो तकनीक होती हैं (i) संतान परीक्षण के आधार पर नर भैंसे द्वारा और (ii) अधिक दूध देने वाली मादा भैंस द्वारा क्लोन तैयार करना। 'लालिमा' के मामले में, क्लोनिंग के लिये कोशिकाएं मादा मुर्राह भैंस के कान से ली गयीं थीं जो अपने तीसरे दुग्धकाल के दौरान 305 दिन के सामान्य काल में 2712 किलोग्राम तथा 471 दिन के कुल स्तनपान काल में 3494 किलोग्रम दूध का उत्पादन कर चुकी है।

डॉ. ए.के. श्रीवास्तव ने जोर देते हुए कहा कि इस तकनीक द्वारा भारत में लम्बे समय तक अच्छी नस्ल की दूध देने वाली भैंसों की संख्या में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि यद्यपि भारत में विश्व की सर्वाधिक भैंसें हैं जो देश के कुल दूध उत्पादन में 55 प्रतिशत का सहयोग कर रही हैं लेकिन अच्छी नस्ल की भैंसों की संख्या काफी सीमित है और इसे तुरंत तेजी से बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

(स्रोतः एनडीआरआई, करनाल)
(हिन्दी प्रस्तुतिः एनएआईपी मास मीडिया परियोजना, डीकेएमए)