दलहनी फसलों की उत्पादन प्रौद्योगिकी पर क्षेत्रीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम

24 अक्टूबर, 2016, जोधपुर

Zonal Workshop-cum-training programme on production technology of pulse crops भाकृअनुप - कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोधपुर द्वारा राजस्थान और गुजरात के 57 कृषि विज्ञान केन्द्रों के लिए दो दिवसीय (24-25 अक्टूबर, 2016) दलहनी फसलों की उत्पादन प्रौद्योगिकी पर क्षेत्रीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

डॉ. एस.के. सिंह, निदेशक, आईसीएआर – आटारी, जोधपुर ने अपने संबोधन में देश में उत्पादित विभिन्न दलहनी फसलों के बारे में चर्चा की। इसके साथ ही दलहनी फसलों के कम होते क्षेत्रफल तथा जलवायु परिवर्तन के बावजूद वर्ष 2020 तक 24 मिलियन टन दलहन उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करने पर जोर दिया ताकि 52 ग्राम प्रति दिन प्रति व्यक्ति द्वारा दाल उपभोग को सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि दलहन उत्पादन तकनीक जिला विशेष पैकेज के तौर पर विकसित करनी और किसानों तक पहुंचाई जानी चाहिए।

डॉ. ओ.पी. यादव, निदेशक, आईसीएआर – काजरी, जोधपुर, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ने कहा कि भारतीय भोजन में दाल प्रोटीन का प्रमुख स्रोत होता है जिसकी उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि कुपोषण को कम किया जा सके।

डॉ. एस.जे. सिंह, निदेशक, आरएआरआई, जयपुर ने अपने संबोधन में खेती लागत को कम करने की बात कही जिससे किसानों की आय को बढ़ाया जा सके। उन्होंने किसानों की सहभागिता से दलहनी फसलों के बीज उत्पादन और उन्नत बीजों से पारंपरिक बीजों को प्रतिस्थापित करने की दर बढ़ाने पर बल दिया।

(स्रोतः भाकृअनुप – कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोधपुर)