भाकृअनुप-सीएमएफआरआई ने मन्नार की खाड़ी में 5 लाख हैचरी-उत्पादित मोती सीप किया जारी

भाकृअनुप-सीएमएफआरआई ने मन्नार की खाड़ी में 5 लाख हैचरी-उत्पादित मोती सीप किया जारी

15 सितम्बर, 2022, मन्नार की खाड़ी, कोच्ची

भाकृअनुप-केन्द्रीय समुद्री मत्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई), कोच्चि के तूतीकोरिन क्षेत्रीय स्टेशन ने आज मन्नार की खाड़ी के चुनिंदा क्षेत्रों में 5 मिमी आकार के 5 लाख हैचरी से उत्पादित मोती सीप (पिंकटाडा फुकाटा) को जारी किया। यह हैचरी स्टॉक पुनःपूर्ति उपाय सेलफिश मात्स्यिकी प्रभाग, भाकृअनुप-सीएमएफआरआई द्वारा इस क्षेत्र में मोती सीपों की घटती आबादी को बहाल करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।

जिला कलेक्टर, के. सेंथिल राज ने तमिलनाडु में थूथुकुडी के सुनामी नगर के पास 'थराइपार' के पास समुद्री मत्स्य पालन का उद्घाटन किया। उन्होंने भाकृअनुप-सीएमएफआरआई के स्टॉक बढ़ाने तथा भारतीय मोती सीप की समुद्री खेती को फिर से शुरू करने के लिए इनके प्रयासों की सराहना की, साथ ही भाकृअनुप-सीएमएफआरआई को अपने अनवरत पॅयास को जारी रखने की ओर इशारा किया, जब तक कि मोती सीप का स्टॉक मोती उत्पादन गतिविधि के लिए पर्याप्त न हो जाए।

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इस गतिविधि से, आने वाले वर्षों में मछुआरों सहित तटीय मछुआरों की उनके सामाजिक जीवन के उत्थान के साथ-साथ आजीविका में बढोत्तरी होने की संभावना है। इसके अलावा, इस स्थान पर उसके विकास के लिए तथा समुद्री-क्षेत्र में मोती सीप की नियमित निगरानी के लिए अलग-अलग आकार के दो पिंजरों को व्यवस्थित स्थान पर तैनात किया गया।

तूतीकोरिन लोकप्रिय रूप से "पर्ल सिटी" के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह 1961 तक मोती उत्पादन और व्यापार केन्द्र की राजधानी के रूप में कार्य करता था, जब तक कि मोती सीप के घटते स्टॉक की सुरक्षा के लिए मत्स्य पालन विभाग द्वारा मोती मत्स्य पालन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। समुद्री मोती की भारी मांग के कारण भाकृअनुप-सीएमएफआरआई के तूतीकोरिन क्षेत्रीय स्टेशन ने संवर्धित मोती उत्पादन पर शोध कार्य शुरू किया और 1973 में प्रौद्योगिकी में सुधार किया था।

थूथुकुडी जिले के स्थानीय मछुआरों विशेष रूप से सिप्पीकुलम गांव की महिला मछुआरों को वित्त पोषित अनुसंधान कार्यक्रमों के माध्यम से मोती संस्कृति तकनीक में उद्यमिता विकास के लिए भाकृअनुप-सीएमएफआरआई वैज्ञानिकों द्वारा प्रशिक्षित किया गया था। हैचरी द्वारा उत्पादित घोंघे के अंडे को एक वयस्क के रूप में बड़ा किया जाता है और इसे मोती की खेती के लिए उपयोग किया जाता है। भाकृअनुप-सीएमएफआरआई ने इससे पहले पारस में मोती सीप की समुद्री खेती पर सराहनीय कार्य किया है। हालांकि, पार क्षेत्रों में नियमित रूप से मछली पकड़ने की गतिविधियों ने अपने स्वस्थ स्टॉक की स्थिति प्राप्त किए बिना आबादी को नियंत्रण में रखा।

वर्तमान में, भाकृअनुप-सीएमएफआरआई अपने समुद्री मत्स्य पालन कार्यक्रम के माध्यम से मन्नार की खाड़ी के मोती सीपों में मोती के भंडार को फिर से जीवंत करने की योजना बना रहा है। इस समर्पित अनुसंधान गतिविधियों के माध्यम से इसके अस्तित्व और स्थिरता का आकलन करने के लिए कड़ी निगरानी की जाएगी।

कार्यक्रम के दौरान, सुनामी कॉलोनी के मछुआरे, जो मोती मछुआरों के वंशज हैं और वर्तमान में चाक मत्स्य पालन में लगे हुए हैं, वे अपने पूर्वजों के अनुभव साझा किए और भाकृअनुप- सीएमएफआरआई के तूतीकोरिन क्षेत्रीय स्टेशन के सहयोग से मोती संवर्धन गतिविधि को अंजाम देने में अपनी रुचि व्यक्त की।

इस समारोह में कलेक्ट्रेट के वरिष्ठ अधिकारी, स्टेशन के वैज्ञानिक एवं तकनीकी कर्मचारी तथा सुनामी नगर के मछुआरे मौजूद थे।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, कोच्चि)

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