भाकृअनुप-वीपीकेएएस, अल्मोड़ा में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त के उपलक्ष्य में भव्य किसान महा-सम्मेलन एवं तकनीकी गोष्ठी का आयोजन

भाकृअनुप-वीपीकेएएस, अल्मोड़ा में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त के उपलक्ष्य में भव्य किसान महा-सम्मेलन एवं तकनीकी गोष्ठी का आयोजन

20 जून, 2026 , अल्मोड़ा

भाकृअनुप-विवेकानन्‍द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान (वीपीकेएएस), अल्मोड़ा के सेन सभागार में आज को एक ऐतिहासिक एवं गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन प्रधानमंत्री द्वारा देश के करोड़ों अन्नदाताओं के खातों में 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' (PM-KISAN) की 23वीं किस्त हस्तांतरित किए जाने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इस भव्य कार्यक्रम में पहाड़ की गोद में बसे किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, जन-प्रतिनिधियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।

 

कार्यक्रम की शुरुआत अत्यंत उत्साहपूर्ण वातावरण में हुई। मुख्य अतिथि के रूप में पधारे श्री अजय टम्‍टा, माननीय राज्‍य मंत्री, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, भारत सरकार एवं सांसद, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ संसदीय क्षेत्र ने संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्‍मी कान्‍त एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। राष्‍ट्रगीत 'वन्दे मातरम्' एवं 'परिषद गीत' के गायन ने पूरे वातावरण को राष्ट्रप्रेम और कृषि के प्रति समर्पण के भाव से ओत-प्रोत कर दिया। इस अवसर पर विशिष्‍ट अतिथियों के रूप में श्री गोविन्‍द सिंह पिलख्‍वाल, माननीय दर्जा राज्‍य मंत्री, उत्‍तराखण्‍ड हथकरघा एवं हस्‍तशिल्‍प विकास परिषद, श्री अजय वर्मा, महापौर, नगर निगम, अल्‍मोड़ा, श्री कैलाश शर्मा, माननीय उपाध्‍यक्ष, भारतीय जनता पार्टी, उत्‍तराखण्‍ड एवं श्री महेश नयाल, माननीय जिला अध्‍यक्ष, भारतीय जनता पार्टी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण माननीय प्रधानमंत्री जी का सीधा प्रसारण रहा, जिसे उपस्थित जनसमूह ने बड़े ध्यान से सुना। प्रधानमंत्री जी ने योजना की 23वीं किस्त के माध्यम से देश के 9 करोड़ 44 लाख से अधिक कृषकों के बैंक खातों में 18,880 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि सीधे हस्तांतरित की। इस क्षण को देखते हुए किसानों के चेहरों पर चमक और संतोष स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।

 

इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री अजय टम्‍टा ने अपने संबोधन में कहा कि यह योजना केवल एक आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री की उस संकल्प शक्ति का प्रतीक है जो 'अन्नदाता' को 'आत्मनिर्भर' बनाने के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि आज सरकार की नीतियां सीधे गांव, गरीब और किसान को लक्षित कर रही हैं, जिससे ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल रही है। उन्‍होंने कहा कि परम्‍परागत खेती के साथ वैज्ञानिक खेती का सामंजस्‍य करके जहां एक ओर मृदा शक्ति को बढ़ाया जा सकता है वहीं दूसरी ओर कृषक आय में भी वृद्धि सम्‍भव है। उन्‍होंने अपने वक्‍तव्‍य में कहा कि उत्तराखंड के 13 में से 10 जिलों में रसायनों का प्रयोग नगण्य है, जो हमारे राज्य को 'जैविक कृषि' का हब बनाने की अपार संभावनाएं प्रदान करता है। उन्होंने 'खेत बचाओ अभियान' का आह्वान करते हुए कहा, "मिट्टी हमारी माँ है, और इसका संरक्षण हमारा धर्म है। हमें परंपरा और विज्ञान के इस अनूठे मेल को अपनाना होगा ताकि हम न केवल उत्पादन बढ़ा सकें, बल्कि मानव जीवन को भी स्वस्थ रख सकें।"

डॉ. लक्ष्‍मी कान्‍त, निदेशक, वीपीकेएएस, ने अपने सम्‍बोधन में सभी अतिथियों का स्‍वागत करते हुए कहा कि भाकृअनुप-विवेकानन्‍द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान केवल शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कृषकों के खेतों तक पहुँचने में विश्वास रखता है। उन्होंने जानकारी दी कि 'खेत बचाओ अभियान' के तहत संस्थान के पांच विशेष दल प्रतिदिन सुदूर गांवों में जाकर किसानों को मृदा उर्वरता और वैज्ञानिक खेती की बारीकियां समझा रहे हैं। उन्होंने संस्थान के 52 वर्षों के शोध आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि गोबर की खाद और कंपोस्ट का प्रयोग मिट्टी की संरचना को सुधारने और फसल की पैदावार बढ़ाने का सबसे सशक्त माध्यम है।

 

तकनीकी सत्र के दौरान, संस्थान के वैज्ञानिकों ने पर्वतीय कृषि की चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। डॉ. प्रकाश चन्‍द घासल ने 'फसलों का एकीकृत पोषण प्रबन्‍धन' पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि कैसे संतुलित खाद का उपयोग कर मिट्टी की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।

डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद मीणा ने 'प्राकृतिक खेती' को वर्तमान समय की मांग बताते हुए कहा कि रसायन मुक्त खेती ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य का आधार है। वहीं, डॉ. अमित कुमार ने 'मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड' के वैज्ञानिक प्रयोगों को सरल भाषा में समझाते हुए किसानों को अपनी मिट्टी का उपचार करने के लिए प्रेरित किया।

इन सभी गतिविधियों की निरंतर मॉनिटरिंग डैश बोर्ड के माध्यम से की जा रही है ताकि प्रत्येक किसान तक योजना का लाभ पहुंच सके।

समारोह में कुल 230 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 54 महिला कृषक एवं 102 पुरुष कृषक भी सम्मिलित है।

(स्रोत-भाकृअनुप-वीपीकेएएस, अलमोड़ा)

 

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