भाकृअनुप-वीपीकेएएस, अल्मोड़ा में कार्डियोपल्मोनरी रिसुसिटेशन और पैलिएटिव केयर जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन

भाकृअनुप-वीपीकेएएस, अल्मोड़ा में कार्डियोपल्मोनरी रिसुसिटेशन और पैलिएटिव केयर जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन

31 अगस्त, 2026, अल्मोड़ा

भाकृअनुप-विवेकानन्‍द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस), अल्मोड़ा के निदेशक, डॉ. लक्ष्मी कान्‍त की अध्‍यक्षता में संस्‍थान के प्रक्षेत्र हवालबाग स्थित बोशी सेन सभागार में आज कार्डियोपल्मोनरी रिसुसिटेशन और पैलिएटिव केयर जागरूकता पर एक विशेष सामुदायिक जन-संपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान, अल्मोड़ा की पहल पर आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम संस्थान के सभी कर्मचारियों के लिए अत्यंत प्रासंगिक और लाभकारी साबित हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में जीवन रक्षा के लिए सीपीआर जैसी जीवन-रक्षक तकनीकों और पैलिएटिव केयर के महत्व के प्रति कर्मचारियों को जागरूक करना था।

   

डॉ. उर्मिला पलारिया, प्राध्यापक एवं अध्यक्ष, निश्चेतना एसएसजीआईएमएसआर, अल्मोड़ा द्वारा गठित दल के सदस्‍यों डॉ. कौशल पांडे, सहायक प्राध्यापक, निश्चेतना विभाग, डा. कर्णजोत कौर, सहायक प्राध्यापक, निश्चेतना विभाग, डॉ. अनुराधा, पीजी-जेआर, निश्चेतना विभाग, डा. ज़ैद, जेआर, निश्चेतना विभाग, श्री सोनू अधिकारी, ओटी तकनीशियन, निश्चेतना विभाग द्वारा संस्‍थान का भ्रमण किया गया तथा कार्यक्रम के दौरान, विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं प्रशिक्षकों द्वारा एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें आपातकाल में तुरंत उठाए जाने वाले कदमों और स्वास्थ्य देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को साझा किया गया।

इस सैद्धांतिक सत्र के पश्चात, डॉक्टरों के मार्गदर्शन में संस्‍थान के कार्मिकों द्वारा इसका व्यावहारिक अभ्यास भी किया गया, जिससे उपस्थित लोगों को सीपीआर देने की सही तकनीक को सीधे सीखने और समझने का अवसर मिला।

    

कार्यक्रम के समापन डॉ. कान्‍त ने विशेषज्ञ दल का आभार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि इस प्रकार की विस्तृत प्रस्तुति और विशेष रूप से व्याहारिक प्रशिक्षण ने हमारे सभी कार्मिकों को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए न केवल सैद्धांतिक जानकारी दी, बल्कि उनमें एक नया आत्मविश्वास भी पैदा किया है। आशा है कि यह प्रशिक्षण हमारे संस्थान के प्रत्येक कर्मचारी के लिए अत्यंत प्रासंगिक और लाभकारी सिद्ध होगा।

(स्रोतः भाकृअनुप-विवेकानन्‍द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा)

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