13 सितम्बर, 2026, कोलकाता एवं जोन-V
भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप–अटारी), कोलकाता तथा पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में (जोन-V) कार्यरत 59 कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) ने केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रमीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित लाइव ऑनलाइन संवाद में भाग लिया। संवाद के दौरान कृषि क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियों, संचालित पहलों तथा उभरती प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई। इसमें विशेष रूप से किसान कल्याण, कृषि आय में वृद्धि, टिकाऊ कृषि, प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग तथा आगामी रबी 2026-27 की तैयारियों पर बल दिया गया।

केन्द्रीय मंत्री ने जोर दिया कि रबी मौसम की तैयारियां किसानों की सक्रिय भागीदारी एवं उनके साथ निरंतर संवाद के आधार पर की जानी चाहिए। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीज एवं कृषि आदानों की समय पर उपलब्धता, उपयुक्त कृषि प्रौद्योगिकियों के उपयोग तथा आवश्यकता-आधारित वैज्ञानिक सलाह सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने कृषि प्रसार तंत्र को किसानों की खेत-स्तरीय समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील एवं उत्तरदायी बनाने तथा वैज्ञानिक ज्ञान, नवाचारों और आधुनिक तकनीकों को जमीनी स्तर पर व्यावहारिक एवं किसान-हितैषी समाधानों में परिवर्तित करने का आह्वान किया।
श्री चौहान ने कृषि विज्ञान केन्द्रों को किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए विश्वसनीय एवं स्थानीय केन्द्रों के रूप में और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने केवीके को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, प्रशिक्षण, कौशल विकास, प्रदर्शन एवं वैज्ञानिक सलाह के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने कर्मचारी-केन्द्रित सुधारों, रिक्त पदों पर समयबद्ध भर्ती तथा राज्य सरकारों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) के माध्यम से संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्रों, राज्य कृषि विभागों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), किसान संगठनों, अनुसंधान संस्थानों तथा अन्य संबंधित हितधारकों के बीच मजबूत समन्वय एवं अभिसरण की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। इसका उद्देश्य सफल कृषि प्रौद्योगिकियों का व्यापक स्तर पर प्रसार करना तथा छोटे, सीमांत एवं संसाधन-विहीन किसानों तक प्रभावी कृषि प्रसार सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। संवाद ने किसानों की खेत-स्तरीय आवश्यकताओं को समझने तथा अनुसंधान, नवाचारों और वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियों को व्यावहारिक, व्यवहार्य एवं आयवर्धक समाधानों में परिवर्तित करने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।
लाइव कार्यक्रम के उपरांत कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा किसानों एवं अन्य हितधारकों के साथ संवाद करते हुए रबी मौसम की प्रभावी तैयारियों, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं कृषि आदानों के समयबद्ध उपयोग तथा उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने के संबंध में जागरूक किया गया। किसानों को जलवायु-सहिष्णु एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों, प्राकृतिक खेती, मृदा एवं जल संसाधनों के कुशल प्रबंधन तथा कृषि में आधुनिक तकनीकों के समावेश के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, दलहन एवं तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता, उन्नत एवं अधिक उपज देने वाली किस्मों के प्रसार, वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों को अपनाने तथा कृषि विविधीकरण के माध्यम से किसानों की आय एवं आजीविका को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया गया।
लाइव संवाद में कुल 1,753 हितधारकों, जिनमें 1,570 किसान ने भाग लिया। कार्यक्रम ने क्षेत्र में किसान-केन्द्रित कृषि प्रसार को सुदृढ़ करने, कृषि प्रौद्योगिकियों के त्वरित प्रसार, जलवायु-सहिष्णु एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने तथा किसानों की आय में वृद्धि के लिए भाकृअनुप–अटारी, कोलकाता और इसके 59 कृषि विज्ञान केन्द्रों की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया।
भाकृअनुप–अटारी, कोलकाता अपने विस्तृत कृषि विज्ञान केन्द्र नेटवर्क के माध्यम से कृषि अनुसंधान और किसान के खेत के बीच की दूरी को कम करने, स्थान-विशिष्ट कृषि प्रौद्योगिकियों के प्रसार, किसानों की क्षमता निर्माण तथा कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। संस्थान का उद्देश्य वैज्ञानिक ज्ञान और प्रौद्योगिकी को अंतिम छोर तक पहुंचाते हुए किसानों को कृषि विकास के केन्द्र में रखना तथा एक समृद्ध, आत्मनिर्भर, टिकाऊ, जलवायु-सहिष्णु और प्रौद्योगिकी-संचालित कृषि क्षेत्र के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने में प्रभावी योगदान देना है।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)








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