14 अक्टूबर, 2026, नई दिल्ली
भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली, ने तेलंगाना के नलगोंडा जिले के सिट्रस किसानों के लिए 12 से 14 अक्टूबर, 2026 तक “सिट्रस उत्पादन तथा प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियां” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण और एक्सपोजर कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य उन्नत सिट्रस उत्पादन पद्धतियों, प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों, मूल्य संवर्धन, फसल विविधीकरण और सतत कृषि पद्धतियों के बारे में किसानों के ज्ञान को बढ़ाना था।
एक्सपोजर कार्यक्रम के हिस्से के रूप में किसानों ने फल विपणन, बाजार संचालन और आपूर्ति शृंखलाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए 12 अक्टूबर को आजादपुर फल मंडी, दिल्ली का दौरा किया। 13 अक्टूबर को उन्होंने नवोन्मेषी कृषि पद्धतियों, खाद्य प्रसंस्करण और उद्यमिता के अवसरों के बारे में जानने के लिए हरियाणा के सोनीपत स्थित अटेरना में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित श्री कंवल सिंह चौहान के फार्म तथा राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टेम), कुंडली का दौरा किया।

डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई, ने प्रतिभागी किसानों को संबोधित किया और कृषि अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास तथा सतत कृषि-खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देने में संस्थान के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन जोखिमों को कम करने और कृषि प्रणालियों की सहनशीलता को मजबूत करने में फसल विविधीकरण के महत्व पर जोर दिया। वैकल्पिक अवसर के रूप में साइट्रस की खेती की संभावनाएं तलाशने के लिए तेलंगाना के किसानों की सराहना करते हुए उन्होंने उन्हें उन्नत उत्पादन प्रौद्योगिकियां, कुशल जल प्रबंधन पद्धतियां और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन तकनीकें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
14 अक्टूबर 2026 को भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. आर.एन. पडारिया, संयुक्त निदेशक (प्रसार), भाकृअनुप-आईएआरआई, के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने अनुसंधान, तकनीकी प्रगति और किसान-उन्मुख प्रसार पहलों के माध्यम से कृषक समुदाय की सेवा करने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने फसल विविधीकरण को अपनाने और कृषि आय बढ़ाने तथा सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए वैकल्पिक फसलों की संभावनाएं तलाशने की दिशा में प्रगतिशील कदम उठाने के लिए तेलंगाना के किसानों की भी सराहना की।
तकनीकी सत्रों में साइट्रस फसलों के महत्व, किस्मों और उत्पादन प्रौद्योगिकियों; उन्नत उत्पादन पद्धतियों; साइट्रस प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों; तथा मूल्य संवर्धित उत्पादों और साइट्रस फलों के मूल्यवर्धन को शामिल किया गया।

प्रतिभागियों ने सिट्रस की खेती, सब्जी उत्पादन और संरक्षित खेती प्रौद्योगिकियों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के लिए साइट्रस बाग, सब्जी अनुसंधान एवं विकास इकाई (यूवीआरडी) और संरक्षित खेती प्रौद्योगिकी केंद्र (सीपीसीटी) का दौरा किया।
कार्यक्रम में पारंपरिक फसलों से आगे कृषि प्रणालियों में विविधता लाने, बाजार-उन्मुख उत्पादन के बारे में किसानों की समझ को मजबूत करने और कृषि लाभप्रदता में सुधार के लिए मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने के महत्व पर जोर दिया गया। इसमें जल संरक्षण, कुशल सिंचाई, संसाधनों के पुनर्चक्रण और सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने के अवसरों पर भी प्रकाश डाला गया।
(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)








फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें