अनुसंधान एवं विकास संस्थानों में अनुसंधान प्रबंधन में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) के आयामों का समावेश अत्यंत आवश्यक हो गया है। तदनुसार, भाकृअनुप के पास बौद्धिक संपदा प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी के लिए दिशानिर्देश हैं और 2 अक्टूबर, 2006 से भाकृअनुप में एक विकेन्द्रीकृत तीन-स्तरीय बौद्धिक संपदा प्रबंधन तंत्र संस्थागत रूप से स्थापित किया गया है। यह प्रणाली ग्यारहवीं योजना की योजना “कृषि प्रौद्योगिकी की बौद्धिक संपदा प्रबंधन एवं हस्तांतरण/व्यावसायीकरण योजना” के माध्यम से लागू की गई थी। इस योजना ने भाकृअनुप में बौद्धिक संपदा के लिए एक अनुकूल वातावरण विकसित करने में योगदान दिया है। इसके कार्यान्वयन से बौद्धिक संपदा अधिकारों के दाखिलों (पेटेंट, पादप किस्म अधिकार, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क आदि) में वृद्धि हुई है। ग्यारहवीं योजना के दौरान प्राप्त उत्साहजनक अनुभवों के आधार पर प्रस्तावित बारहवीं योजना में इसका दायरा काफी बढ़ाया गया। इस विस्तारित दायरे को नया नाम ‘राष्ट्रीय कृषि नवाचार कोष’ दिया गया, जिसके तीन घटक हैं— घटक I: नवाचार कोष (बौद्धिक संपदा प्रबंधन एवं कृषि प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण/व्यावसायीकरण की ग्यारहवीं योजना की योजना); घटक II: इनक्यूबेशन कोष (कृषि प्रौद्योगिकियां विकसित करने वाले संस्थानों में कृषि-व्यवसाय इनक्यूबेशन केन्द्रों को सहायता); और घटक III: आर्या (कृषि में युवाओं को आकर्षित करना और बनाए रखना), जिसे भाकृअनुप के विस्तार प्रभाग के माध्यम से लागू किया गया।
एनएआईएफ के उद्देश्य
घटक I (नवाचार कोष)
- भाकृअनुप संस्थानों में रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देना;
- भाकृअनुप/एनएआरएस प्रणाली के भीतर उत्पन्न नवाचारों/बौद्धिक संपदाओं (आईपी) की सुरक्षा/प्रबंधन के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत करना;
- भाकृअनुप/एनएआरएस से संबंधित बौद्धिक परिसंपत्तियों के उल्लंघन, अनुचित दोहन और दुरुपयोग पर निगरानी रखना तथा आवश्यकता के अनुसार उसका प्रयास करना;
- बौद्धिक संपदा अधिकारों और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण/व्यावसायीकरण के आयामों में क्षमता निर्माण को बढ़ाना;
- भाकृअनुप के नए एवं कार्यान्वित दिशानिर्देशों/नीतियों के सिद्धांतों के अनुसार नए ज्ञान का प्रबंधन करना।
घटक II (इनक्यूबेशन कोष)
- एनएआरएस में कृषि-व्यवसाय इनक्यूबेटर केन्द्रों को अग्रणी केन्द्रों के रूप में स्थापित/परिवर्तित करना, जो प्रौद्योगिकी और कौशल उन्नयन, आदान आपूर्ति तथा बाजार सहायता प्रदान करेंगे, जिससे व्यवहार्य उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा और उद्यमियों के लिए सतत रोजगार सृजित होंगे;
- हितधारकों के सहयोग से मूल्य श्रृंखला के पायलट स्तर से अंतिम स्तर तक विस्तार करना;
- उपयुक्त प्रौद्योगिकियों, जिसमें जमीनी स्तर के नवाचार भी शामिल हैं, की खोज और सहायता करना, जो भविष्य में तीव्र विकास और प्रतिस्पर्धी तकनीकी नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण हैं;
- संभावित उद्यमियों को प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण प्रदान करना; प्रभावी प्रतिस्पर्धा के लिए मूल्यवर्धित मानव संसाधन तैयार करना; और
- आशाजनक नवाचारों या प्रौद्योगिकियों को अपनाने वाले संभावित इनक्यूबेट्स/उद्यमियों को सीड मनी सहायता प्रदान करना।








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