भाकृअनुप-एनबीएफजीआर, करनाल ने 43वां स्थापना दिवस का किया आयोजन

भाकृअनुप-एनबीएफजीआर, करनाल ने 43वां स्थापना दिवस का किया आयोजन

21 सितंबर, 2026, करनाल

भाकृअनुप-राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, करनाल ने अपने 43वें स्थापना दिवस को बड़े उत्साह और गौरव के साथ मनाया। यह संस्थान की पशु आनुवंशिक संसाधनों के प्रबंधन, वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने, प्रौद्योगिकियों के विकास और किसानों तथा अन्य हितधारकों के लाभ के लिए नीतियों को समर्थन देने की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ भाकृअनुप अधिकारियों, पूर्व निदेशकों और वैज्ञानिकों, किसानों, संस्थागत भागीदारों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा कर्मचारियों ने एकत्र होकर पशु विज्ञान के क्षेत्र में चार दशकों से अधिक के योगदान का स्मरण किया।

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि श्री अतुल जे. सिरिस्कर, आईएफएस, पीसीसीएफ-सह-सदस्य सचिव, हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड ने किसानों और हितधारकों के साथ स्थानीय संसाधनों एवं पारंपरिक ज्ञान के समानतापूर्ण लाभ-साझाकरण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने देशी पशुधन नस्लों के संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और आनुवंशिक संसाधनों के बेहतर दस्तावेजीकरण, ट्रेसेबिलिटी और सतत प्रबंधन के लिए जियो-टैगिंग जैसे आधुनिक उपकरणों के उपयोग की वकालत की। उन्होंने उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए शोधकर्ताओं, किसानों और उद्यमियों के बीच समुदाय-आधारित संपर्क को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

ICAR-NBAGR, Karnal Celebrates 43rd Foundation Day

अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों में डॉ. यशपाल सिंह मलिक, उप-महानिदेशक (कृषि शिक्षा), ICAR; डॉ. एस. के. दुबे, सदस्य, सामान्य निकाय, भाकृअनुप; और डॉ. एच.के. नरूला, सहायक महानिदेशक (एपी एवं बी), भाकृअनुप शामिल थे। पूर्व एवं सेवारत अधिकारियों, भाकृअनुप संस्थानों और केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के निदेशकों के साथ-साथ किसानों और उद्यमियों ने भी समारोह में भाग लिया।

डॉ. यशपाल सिंह मलिक ने छात्रों, किसानों और हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से मानव संसाधन विकास में एनबीएपजीआर की महत्वपूर्ण भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया, जिससे पशुधन क्षेत्र की मानव पूंजी को मजबूत किया जा सके।

डॉ. एस.के. दुबे ने कर्मचारियों के बीच आत्म-समर्पण के महत्व और उत्पादकता तथा संस्थागत उत्कृष्टता बढ़ाने के लिए सकारात्मक एवं स्वस्थ कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. एच. के. नरूला ने पारंपरिक लक्षण-वर्णन दृष्टिकोणों से आगे बढ़ने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला तथा देशी आनुवंशिक संसाधनों के मूल्य संवर्धन, प्रभावी उपयोग और संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने किसान-केंद्रित अनुसंधान और कुशल प्रौद्योगिकी प्रसार के महत्व को भी रेखांकित किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत संबोधन के साथ हुआ, जिसके बाद डॉ. एन.एच. मोहन, निदेशक, भाकृअनुप-एनबीएफजीआर, ने एक व्यापक प्रस्तुति दी। उन्होंने संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और पांच वर्षीय रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने पशु आनुवंशिक संसाधनों के लक्षण-वर्णन, संरक्षण और समुदाय-आधारित उपयोग के लिए एक अंतर्विषयक एवं एकीकृत दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दिया, जो विकसित भारत@2047 के विजन के तहत सतत पशुधन विकास, खाद्य एवं आजीविका सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है। उन्होंने गैर-वर्णित पशु आनुवंशिक संसाधनों (AnGR) को शून्य करने के लक्ष्य की दिशा में मिशन को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

ICAR-NBAGR, Karnal Celebrates 43rd Foundation Day

हितधारक संवाद सत्र और कृषि तथा देशी पशुधन संरक्षण में उनके योगदान के लिए प्रगतिशील पशुपालकों का सम्मान कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे।

“भारतीय कृषि और पशुधन क्षेत्र में महिला किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देते हुए, एससीएसपी कार्यक्रम के तहत महिला किसानों को डेयरी किट और गमबूट सहित व्यक्तिगत सुरक्षा संबंधी सामग्री प्रदान की गई।”

कार्यक्रम में संस्थागत प्रकाशनों, मैनुअल, एक लघु वीडियो और ज्ञान संसाधनों का विमोचन भी किया गया। पोस्टर और खेल प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए और प्रतिभागियों को विधिवत सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी गणमान्य व्यक्तियों, किसानों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों, कर्मचारियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। यह समारोह सतत पशुधन विकास, भारत की समृद्ध पशुधन आनुवंशिक विविधता के संरक्षण और विकसित भारत@2047 के विजन के तहत लचीली एवं आत्मनिर्भर पशुधन प्रणालियों के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने हेतु भाकृअनुप-एनबीएफजीआर की संरक्षण, अनुसंधान और क्षमता निर्माण के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता में एक और मील का पत्थर साबित हुआ।

कुल 82 किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जो संस्थान की मजबूत पहुंच और सहभागिता को दर्शाता है।

(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, करनाल)

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