23–25 सितंबर, 2026, बेंगलुरु
भाकृअनुप-राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान एवं रोग सूचना विज्ञान संस्थान (भाकृअनुप-निवेदी), बेंगलुरु ने 23–25 सितंबर, 2026 तक भारतीय पशु चिकित्सा प्रतिरक्षा विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी सोसायटी के XXXI वार्षिक सम्मेलन और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (वीआईबीसीओएन 2026) की मेजबानी की, जिसमें पशु स्वास्थ्य और उत्पादन को जैव प्रौद्योगिकी तथा रोग संबंधी जानकारी के माध्यम से आगे बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत को एक मंच पर लाया गया। सम्मेलन का उद्घाटन आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों एवं प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि, प्रो. (डॉ.) मंदीप शर्मा, कुलपति, एनडीवीएसयू, जबलपुर, मध्य प्रदेश ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पशुधन उत्पादकता बढ़ाने और ‘विकसित भारत-2047’ के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकियां विकसित करने में जैव प्रौद्योगिकी उपकरणों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने आगे कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौतियों का समाधान करने के लिए स्थानीय स्तर पर नवाचार करें और वैश्विक स्तर पर सहयोग करें।

विशिष्ट अतिथि, डॉ. यशपाल सिंह मलिक, उप-महानिदेशक (शिक्षा), भाकृअनुप ने पशुधन क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए शैक्षणिक पाठ्यक्रम के साथ-साथ अनुसंधान गतिविधियों में AI एवं ML जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों तथा जैव प्रौद्योगिकी उपकरणों के एकीकरण पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने ICAR के शिक्षा प्रभाग द्वारा की गई प्रमुख पहलों का भी उल्लेख किया।
एक अन्य विशिष्ट अतिथि, डॉ. जतिंदर पॉल सिंह गिल, कुलपति, जीएडीवीएएसयू, लुधियाना, पंजाब ने रोग प्रतिरोधक क्षमता और अधिक उत्पादकता के लिए पशुधन की आनुवंशिक क्षमता बढ़ाने हेतु उन्नत प्रजनन तकनीकों में जैव प्रौद्योगिकी उपकरणों के हस्तक्षेप पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर डॉ. बी. आर. गुलाटी, निदेशक, भाकृअनुप-निवेदी तथा अध्यक्ष एवं वीआईबीसीओएन-2026 के चेयरमैन ने युवा शोधकर्ताओं/छात्रों से आह्वान किया कि वे विभिन्न सत्रों के अंतर्गत आयोजित मुख्य व्याख्यान/विशेष व्याख्यानों के साथ-साथ वैज्ञानिक विचार-विमर्श से प्रेरणा और प्रोत्साहन प्राप्त करें तथा पशु स्वास्थ्य से संबंधित चुनौतियों का समाधान करें।
सम्मेलन के तीन दिवसीय आयोजन में 10 वैज्ञानिक सत्रों के साथ-साथ 2 विशेष सत्र सम्मेलन की विषयवस्तु, "स्मार्ट जैव प्रौद्योगिकी नवाचारों और रोग संबंधी जानकारी के माध्यम से पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन प्रणालियों में बदलाव" पर केंद्रित रहे। इसमें शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान पेशेवरों, जैव प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं, शोधार्थियों और छात्रों ने भाग लिया तथा इस बात पर विचार-विमर्श किया कि उभरती प्रौद्योगिकियां पशु रोगों के निदान, रोकथाम और प्रबंधन में किस प्रकार बदलाव ला रही हैं तथा पशुधन उत्पादन प्रणालियों को मजबूत कर रही हैं।
सम्मेलन में पशु चिकित्सा जैव प्रौद्योगिकी, रोग संबंधी जानकारी, प्रतिरक्षा विज्ञान, निदान, टीके, महामारी विज्ञान और पशु स्वास्थ्य प्रणालियों में उभरती प्रगति पर विचार-विमर्श के लिए देश-विदेश के प्रमुख विशेषज्ञों की उपस्थिति रही।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों में डॉ. विवेक कपूर, प्रोफेसर, पेन स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका; डॉ. सागर गोयल, प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा, अमेरिका; डॉ. पॉली रॉय, प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा, अमेरिका; डॉ. जोनाथन रशटन, चेयर ऑफ इकोनॉमिक्स ऑफ एनिमल हेल्थ, रॉयल (डिक) स्कूल ऑफ वेटरिनरी स्टडीज, ब्रिटेन; डॉ. नागेंद्र सिंगनल्लूर, वरिष्ठ शोध वैज्ञानिक, सीएसआईआरओ, ऑस्ट्रेलिया शामिल थे। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने पूर्ण सत्र में भाग लिया।
इस अवसर पर डॉ. एस. मनोहरन, सचिव, आईएसवीआईबी; निदेशक, सेंटर फॉर एनिमल हेल्थ स्टडीज, टीएएनयूवीएएस ने सोसायटी द्वारा की गई गतिविधियों पर प्रकाश डाला और ओरिएशन पुरस्कार तथा आईएसवीआईबी फेलो जैसे उल्लेखनीय पुरस्कार उम्मीदवारों को प्रदान किए।
सम्मेलन अगले दो दिनों तक जारी रहेगा, जिसमें दो विशेष सत्र शामिल होंगे। इनमें एक सत्र ‘उद्योग बैठक/सम्मेलन एवं जैव प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए किसान–उद्योग–शिक्षा जगत सहयोग’ तथा दूसरा सत्र ‘सीमापार पशु रोग कार्यक्रम का नियंत्रण एवं उन्मूलन’ पर होगा।
सम्मेलन में भारत के विभिन्न हिस्सों से 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान एवं रोग सूचना विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु)








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