23 सितंबर, 2026, कोच्चि
भारत के मत्स्य क्षेत्र में महिलाओं की मान्यता, समावेशन और भागीदारी को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए, ‘भारत की नीली अर्थव्यवस्था में महिलाओं को सशक्त बनाना: मान्यता, समावेशन और भागीदारी’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय मछुआरिन सम्मेलन आईसीएआर–केंद्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान, कोच्चि में आयोजित किया गया।
सम्मेलन का आयोजन सोसाइटी ऑफ फिशरीज टेक्नोलॉजिस्ट्स (इंडिया) (एसओएफटी) ने भाकृअनुप-सीआईएफटी, कोच्चि के सहयोग से किया। कार्यक्रम में महिला मत्स्य पासक की प्रौद्योगिकी, वित्त, संस्थागत सहायता तथा बाजार के अवसरों तक पहुंच बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा की गई। इसमें डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता, व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, जलवायु शिक्षा और आपदा तैयारी पर व्यावहारिक सत्र भी शामिल थे।
कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. बी. मीनाकुमारी, पूर्व उप-महानिदेशक (मत्स्य विज्ञान), भाकृअनुप, नई दिल्ली और मुख्य अतिथि ने किया। अपने संबोधन में डॉ. मीनाकुमारी ने मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया तथा इसके विकास और वृद्धि में उनके बहुमूल्य योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “महिलाएं मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र की रीढ़ हैं, जो पूरी मूल्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, विशेष रूप से प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन में।

हालांकि, उनके कार्य को काफी हद तक कम महत्व दिया जाता है और उनका प्रतिनिधित्व भी कम है। मछुआरिनों को सशक्त बनाने के लिए औपचारिक मान्यता, ऋण, प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण, सामाजिक सुरक्षा और निर्णय लेने के मंचों तक अधिक पहुंच आवश्यक है। महिलाओं को केवल लाभार्थियों के रूप में नहीं, बल्कि उद्यमियों, नवोन्मेषकों और जलवायु दूतों के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए, जो अधिक समावेशी, लचीली और टिकाऊ नीली अर्थव्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। मैं अधिक से अधिक महिलाओं को आगे आने और सरकारी पहलों तथा मत्स्य कार्यक्रमों के माध्यम से उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करती हूं।”
डॉ. ग्रिन्सन जॉर्ज, निदेशक, भाकृअनुप–केन्द्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान, कोच्चि ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
डॉ. जॉर्ज नीनान, निदेशक, भाकृअनुप-केन्द्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान और अध्यक्ष, सॉफ्टी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किए जाने के संदर्भ में आयोजित किया गया, जो खाद्य-आधारित प्रणालियों में महिलाओं के योगदान को मान्यता देने तथा उनकी आजीविका, नेतृत्व और भागीदारी में अधिक निवेश को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करता है।
सम्मेलन में केरल, लक्षद्वीप, तमिलनाडु, पुडुचेरी, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश की 60 महिला प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने मछली पकड़ने से संबंधित विभिन्न व्यवसायों का प्रतिनिधित्व किया, जिनमें संग्रहण, मछली प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, समुद्री शैवाल की खेती, ट्राउट पालन, सूखी मछली की बिक्री, प्रसंस्करण और विपणन तथा मत्स्य पालन शामिल थे।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान, कोच्चि)







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