25 सितंबर, 2026, गोनीकोप्पल, कोडागु
भाकृअनुप-केवीके कोडागु अपने स्वर्ण जयंती पड़ाव की ओर बढ़ रहा है। इसी क्रम में, आज भाकृअनुप–भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु के निदेशक प्रो. डॉ. तुषार कांति बेहरा के दौरे के दौरान केवीके ने प्रौद्योगिकी प्रसार, प्राकृतिक खेती, कौशल विकास और किसानों की क्षमता निर्माण के क्षेत्र में किए जा रहे अपने प्रयासों को प्रदर्शित किया।
डॉ. बेहरा ने अथुर स्थित भाकृअनुप-केवीके कोडागु फार्म का दौरा किया। इस दौरान उन्हें केवीके की प्रमुख गतिविधियों, क्षेत्रीय प्रदर्शनों और विस्तार पहलों के बारे में जानकारी दी गई। इन गतिविधियों में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने, किसानों की क्षमता मजबूत करने और कोडागु जिले में उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने को सुगम बनाने के प्रयासों पर विशेष प्रकाश डाला गया।

दौरे के दौरान डॉ. बेहरा ने अर्का प्राकृतिक खेती मॉडल ब्लॉक और नर्सरी इकाई की समीक्षा की तथा फार्म में किए जा रहे विभिन्न प्रदर्शनों और विस्तार गतिविधियों के संबंध में केवीके के वैज्ञानिकों के साथ बातचीत की। उन्होंने टिकाऊ और किसान-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के प्रसार को और मजबूत करने के लिए सुझाव भी दिए।
कार्यक्रम के तहत “एक पेड़ मां के नाम” के अंतर्गत वृक्षारोपण गतिविधि आयोजित की गई। निदेशक ने स्वामी विवेकानंद यूथ मूवमेंट (एसवीवाईएम) के सहयोग से भाकृअनुप-केवीके कोडागु द्वारा आयोजित कृषि-आधारित उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने वाले दिव्यांग 25 प्रशिक्षुओं को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए।
डॉ. बेहरा ने भाकृअनुप-केवीके कोडागु में मृदा विज्ञान वैज्ञानिक द्वारा विकसित प्राकृतिक खेती मॉडल पर प्रकाश डालने वाले एक विस्तार प्रकाशन का विमोचन किया। उन्होंने KVK के प्रारंभिक प्रोफाइल वीडियो की भी समीक्षा की और इसके बुनियादी ढांचे, तकनीकी हस्तक्षेपों, प्रदर्शनों तथा किसान-केंद्रित पहलों को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण भाकृअनुप-केवीके कोडागु के स्वर्ण जयंती समारोह की घोषणा रही, जो कृषि प्रौद्योगिकी प्रसार, किसान प्रशिक्षण और विस्तार सेवाओं की इसकी यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस उपलब्धि से केवीके की भविष्य की पहलों को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिसमें किसान–वैज्ञानिक संपर्क को मजबूत करने, टिकाऊ और नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने, कौशल विकास को बढ़ाने और प्रौद्योगिकी के प्रसार का विस्तार करने पर अधिक जोर दिया जाएगा। ये प्रयास लचीली कृषि प्रणालियों के निर्माण, वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने में सुधार और कोडागु के किसानों तथा ग्रामीण समुदायों के बीच टिकाऊ आजीविका को समर्थन देने में योगदान देंगे।
(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु)







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