24 सितंबर, 2026, मोतिहारी, बिहार
भाकृअनुप–महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी ने स्वच्छता ही सेवा (एसएचएस)–2026 के तहत सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों की सक्रिय भागीदारी के साथ स्वच्छता जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य जन भागीदारी को मजबूत करना तथा स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ ग्रामीण समुदायों के निर्माण के लिए स्वच्छता, पर्यावरणीय साफ-सफाई, जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन और सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. राघवेंद्र सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई के समग्र मार्गदर्शन में किया गया। श्री के. रंजीत, उप-महानिरीक्षक (डीआईजी), एसएसबी, एसएसबी के जवानों के साथ भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई के वैज्ञानिकों, तकनीकी कर्मियों तथा कर्मचारियों ने कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया।
संवाद में इस संदेश पर ध्यान केन्द्रित किया गया कि स्वच्छता एक साझा जिम्मेदारी है और स्वस्थ एवं सुदृढ़ गांवों के निर्माण के लिए निरंतर सामुदायिक भागीदारी आवश्यक है। प्रतिभागियों ने अपशिष्ट के उचित निपटान और प्रबंधन, सार्वजनिक एवं संस्थागत स्थानों की स्वच्छता बनाए रखने, पर्यावरणीय स्वच्छता तथा अपशिष्ट के अनियंत्रित संचय को रोकने की आवश्यकता पर चर्चा की। बाढ़ संभावित ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के महत्व पर विशेष ध्यान दिया गया, जहां अप्रबंधित ठोस अपशिष्ट और अस्वच्छ परिवेश बाढ़ के दौरान और उसके बाद स्वच्छता एवं पर्यावरण संबंधी चुनौतियों को बढ़ा सकते हैं।
एसएसबी के प्रतिनिधियों ने स्वच्छता बनाए रखने में सामूहिक जिम्मेदारी, अनुशासन और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने घरेलू, संस्थागत और सामुदायिक स्तरों पर जागरूकता को नियमित कार्रवाई में बदलने के महत्व पर प्रकाश डाला। संवाद में “जीवंत गांव” की अवधारणा पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें स्वच्छता, पर्यावरणीय साफ-सफाई, जन भागीदारी और टिकाऊ विकास को स्वस्थ एवं सुदृढ़ ग्रामीण समुदायों के आवश्यक घटकों के रूप में रेखांकित किया गया।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, डॉ. राघवेंद्र सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई ने जोर दिया कि स्वच्छता केवल किसी अभियान या विशेष अवधि तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे दैनिक व्यवहार का अभिन्न हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने स्वच्छ परिवेश, पर्यावरणीय स्थिरता, कृषि पारिस्थितिकी तंत्र और स्वस्थ ग्रामीण समुदायों के बीच घनिष्ठ संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं को अपनाने और अन्य लोगों को राष्ट्रीय स्वच्छता आंदोलन में सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
स्वच्छता पहलों की सफलता जागरूकता को व्यक्तिगत जिम्मेदारी और सामूहिक कार्रवाई में बदलने पर निर्भर करती है। प्रतिभागियों से कार्यस्थलों, खेतों और सामुदायिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखने, अपशिष्ट उत्पादन को कम करने, अपशिष्ट का उचित पृथक्करण और निपटान सुनिश्चित करने तथा सामुदायिक भागीदारी को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करने का आग्रह किया गया। इस बात पर जोर दिया गया कि “स्वच्छता एक दिन की गतिविधि नहीं है; यह हमारे स्वास्थ्य, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के प्रति निरंतर जिम्मेदारी है।”

जागरूकता कार्यक्रम के बाद, एसएसबी के जवानों और संस्थान के कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी के साथ भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई में संयुक्त स्वच्छता अभियान चलाया गया। प्रतिभागियों ने संस्थान परिसर के अंदर और आसपास चिन्हित क्षेत्रों की सफाई की, कूड़ा-कचरा और अनावश्यक सामग्री एकत्र की तथा आसपास के समग्र परिवेश की स्वच्छता में सुधार के लिए योगदान दिया। इस गतिविधि ने जागरूकता से आगे बढ़कर प्रत्यक्ष और सामूहिक कार्रवाई के महत्व को प्रदर्शित किया।
एसएसबी के नेतृत्व और जवानों की भागीदारी ने स्वच्छता ही सेवा–2026 के तहत जन भागीदारी को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया और स्वच्छता एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारी को बढ़ावा देने में अनुसंधान संस्थानों, सुरक्षा बलों और स्थानीय समुदायों के बीच सहयोग की संभावनाओं को प्रदर्शित किया।
कार्यक्रम का समापन स्वच्छता, जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय साफ-सफाई तथा सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। इस पहल के माध्यम से, भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई ने “स्वच्छता से स्वास्थ्य, स्वच्छता से समृद्धि” के संदेश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और प्रत्येक व्यक्ति को अधिक स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ ग्रामीण समुदायों के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
(स्रोत: भाकृअनुप–महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी)







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