29 जनवरी, 2026, पश्चिम चंपारण
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना, तथा कृषि विज्ञान केन्द्र, माधोपुर, के संयुक्त तत्वाधान में पश्चिम चंपारण के किसानों के लिए दो दिवसीय (28 से 29 जनवरी 2026) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जो केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि खेती को लेकर सोच बदलने का अनुभव बनकर सामने आया।

इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले जिला के 200 से अधिक किसानों ने महसूस किया कि सीमित भूमि और संसाधनों के बावजूद खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। कार्यक्रम में शामिल किसानों ने जाना कि अब खेती केवल धान या गेहूं तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और जैविक खाद निर्माण जैसे कार्यों को जोड़कर वर्ष भर नियमित आय प्राप्त की जा सकती है। विशेषज्ञों द्वारा दी गई व्यावहारिक जानकारी ने किसानों को यह विश्वास दिलाया कि बदलते मौसम और बाजार की अनिश्चितताओं के बीच भी खेती सुरक्षित बन सकती है।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि, श्री आर.के. तिवारी, प्रबंधक, मगध शुगर मिल, बेतिया, ने किसानों के अनुभवों को सुनते हुए कहा कि जब किसान वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाते हैं, तभी ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि कृषि और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल से किसानों को बाजार से जोड़ना आसान होगा और उनकी उपज को सही मूल्य मिलेगा।

कार्यशाला के आयोजन सचिव, डॉ. संजीव कुमार, प्रभागाध्यक्ष, फसल अनुसंधान, ने किसानों को यह संदेश दिया कि खेती में विविधता ही स्थायित्व की कुंजी है। उन्होंने बताया की समेकित कृषि प्रणाली किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त माध्यम है जबकि फसल विविधीकरण को अपनाकर जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिमों का प्रभाव भी कम किया जा सकता है।
संयोजक, डॉ. शिवानी, प्रधान वैज्ञानिक, ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते जलवायु के परिद्रश्य मे सिर्फ धान और गेंहु की खेती तक सीमित रहना किसानों के लिए जोखि से भरा हैं, अतः दलहन, तिलहन, सब्जी एवं चारा फसलों के माध्यम से खेती मे विविधता लाकर किसानों अपनी आमदनी बढ़ा सकते है।
यह कार्यक्रम डॉ. अनुप दास, निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना, के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसमें, डॉ. पी.एस. पाण्डेय, कुलपति, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, का सहयोग प्राप्त हुआ।

डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह, प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर, ने कहा कि किसानों की सफलता ही ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस कार्यशाला से प्रेरित किसान आने वाले समय में अपने गांवों में दूसरों के लिए उदाहरण बनेंगे।
कार्यशाला के दौरान किसानों को पावर स्प्रेयर, नैपसैक स्प्रेयर, वर्मी बेड और कुदाल जैसे कृषि आदान भी प्रदान किए गए, जिससे फसल सुरक्षा, रोग-कीट प्रबंधन एवं जैविक खाद उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
(स्रोतः भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना तथा कृषि विज्ञान केन्द्र, माधोपुर)








Like on Facebook
Subscribe on Youtube
Follow on X X
Like on instagram