28 सितंबर, 2026, कर्नाटक
17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक “स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत” विषय के तहत आयोजित किए जा रहे स्वच्छता ही सेवा (एसएचएस) कार्यक्रम के एक भाग के रूप में जागरूकता को बढ़ावा देने और जन भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न स्वच्छता एवं स्वच्छता-संबंधी गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं।
इस अभियान के एक भाग के रूप में, भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून ने 28 सितंबर 2026 को बल्लारी जिले के संदूर तालुका के एससीएसपी-अंतर्गत अपनाए गए गांव तुमती थांडा में “स्वच्छता से समृद्धि” अभियान आयोजित किया।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश था, “प्लास्टिक को ना कहें-पर्यावरण-अनुकूल वातावरण के लिए केवल कपड़े/जूट के थैलों का उपयोग करें।” किसानों और ग्रामीणों को जागरूक किया गया तथा एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक थैलों से बचने और प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने तथा स्वच्छ एवं स्वस्थ गांव के वातावरण को बनाए रखने के लिए पुन: उपयोग किए जा सकने वाले, पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम के तहत पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने और घरेलू स्तर पर सब्जी उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को रसोई उद्यानों के लिए सब्जी किट वितरित किए गए। कार्यक्रम में किसानों और स्थानीय निवासियों की सक्रिय भागीदारी के साथ स्वच्छता श्रमदान और गांव की सफाई गतिविधियाँ भी शामिल थीं।
गतिविधियों में “कचरे से संपदा” की अवधारणा को उजागर किया गया तथा स्वच्छ, स्वस्थ और अधिक टिकाऊ पर्यावरण के लिए प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और कपड़े तथा जूट के थैलों को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया गया।
कुल 35 प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया और स्वच्छता एवं जागरूकता गतिविधियों में योगदान दिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून)







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