21 जून, 2026, मध्य प्रदेश
भाकृअनुप-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर, ने भाकृअनुप-केन्द्रीय धान अनुसंधान संस्थान, कटक तथा भाकृअनुप-केन्द्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान, हिसार, के सहयोग से मध्य प्रदेश के मंडला जिले के दुगरिया गांव में एक जनजातीय उप-योजना (टीएसपी) कार्यक्रम का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस शाकनाशी-प्रतिरोधी धान (एचटीआर), सीआर धान 807 के उपयोग के माध्यम से जंगली धान के प्रबंधन पर रहा, जो इमेजेथापायर शाकनाशी के प्रयोग द्वारा जंगली धान के प्रभावी नियंत्रण को संभव बनाता है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी जनजातीय किसानों को जंगली धान तथा धान में अन्य खरपतवारों के प्रबंधन हेतु इमेजेथापायर तथा प्रीटिलाक्लोर + पाइराजोसल्फ्यूरॉन-एथाइल का वितरण किया गया। वैज्ञानिकों ने प्रभावी और सतत खरपतवार प्रबंधन के लिए शाकनाशी के अनुशंसित उपयोग विधियों और समय का भी प्रदर्शन किया। किसानों को शाकनाशी-प्रतिरोधी धान तकनीक तथा एकीकृत खरपतवार प्रबंधन पद्धतियों के उचित उपयोग के बारे में जागरूक किया गया।

कार्यक्रम के तहत "खेत बचाओ अभियान" भी चलाया गया, जिसके दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों के खेतों का दौरा किया तथा खरपतवार प्रबंधन और उन्नत फसल उत्पादन पद्धतियों पर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। इस क्षेत्रीय भ्रमण ने किसानों के साथ प्रत्यक्ष संवाद को सुगम बनाया तथा स्थानीय उत्पादन संबंधी समस्याओं के समाधान में सहायता की।
टीम ने जनजातीय उप-योजना के अंतर्गत एकीकृत कृषि प्रणाली दृष्टिकोण के तहत लाभार्थी परिवारों को वितरित किए गए कड़कनाथ चूजों के पालन की भी समीक्षा की। ये चूजे स्वस्थ पाए गए और अच्छी तरह से बढ़ रहे थे, जो बैकयार्ड पोल्ट्री के माध्यम से जनजातीय कृषक परिवारों की आय वृद्धि, आजीविका विविधीकरण और पोषण सुरक्षा की क्षमता को दर्शाते हैं।
इस कार्यक्रम से कुल 75 जनजातीय किसानों को प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, क्षेत्रीय भ्रमण और क्षमता निर्माण गतिविधियों के माध्यम से लाभ मिला। इस कार्यक्रम ने जनजातीय किसानों में नवीन खरपतवार प्रबंधन तकनीकों और सतत कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूकता को सुदृढ़ किया, जिससे कृषि उत्पादकता और आजीविका सुरक्षा में सुधार हो सके।
(स्रोत: भाकृअनुप-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर)







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