भाकृअनुप–पुष्पकृषि अनुसंधान निदेशालय, पुणे, ने येलसे, पवना नगर, तहसील मावल में गुलाब उत्पादकों के बीच संतुलित उर्वरक उपयोग पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा शुरू किए गए उर्वरकों के संतुलित उपयोग हेतु गहन अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया।

दौरे के दौरान वैज्ञानिकों की टीम ने किसानों से संवाद किया और रासायनिक उर्वरकों तथा पौध संरक्षण रसायनों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। वैज्ञानिकों ने उत्पादकों को जैव उर्वरकों और जैव नियंत्रण उपायों को टिकाऊ विकल्प के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि फसल उत्पादकता बनी रहे और मृदा स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।
वैज्ञानिकों ने देखा कि पॉलीहाउस में गुलाब की खेती में रासायनिक उर्वरकों के लगातार तथा अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी की क्षारीयता तथा विद्युत चालकता (ईसी) स्तर बढ़ गया है, जिससे पोषक तत्वों की उपलब्धता एवं फसल प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इन समस्याओं के समाधान के लिए पॉलीहाउस इकाइयों से मिट्टी के नमूने एकत्र किए गए, ताकि मृदा उर्वरता और पोषक तत्वों की स्थिति का आकलन किया जा सके।

इस पहल का उद्देश्य मृदा परीक्षण आधारित पोषक प्रबंधन को बढ़ावा देना तथा उत्पादकता से समझौता किए बिना रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने की संभावनाओं का मूल्यांकन करना है। किसानों को बताया गया कि मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रयोग से लागत में कमी, पोषक तत्व उपयोग दक्षता में वृद्धि तथा गुलाब उत्पादन की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सकती है।
कार्यक्रम में गुलाब उत्पादकों ने सक्रिय भागीदारी की और टिकाऊ उत्पादन के लिए सुझाई गई तकनीकों को अपनाने में गहरी रुचि व्यक्त की।
(स्रोत: भाकृअनुप–फ्लोरीकल्चर अनुसंधान निदेशालय, पुणे)







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