भाकृअनुप-एनबीएफजीआर, लखनऊ और केयूएफओएस ने अनुसंधान एवं शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए समझौता ज्ञापन पर किया हस्ताक्षर

भाकृअनुप-एनबीएफजीआर, लखनऊ और केयूएफओएस ने अनुसंधान एवं शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए समझौता ज्ञापन पर किया हस्ताक्षर

19 जून, 2026, कोच्चि

भाकृअनुप-राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, लखनऊ, और केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशन स्टडीज (केयूएफओएस), कोच्चि, ने मत्स्य एवं जलीय आनुवंशिक संसाधनों के क्षेत्र में शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए आज एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया।

एमओयू हस्ताक्षर समारोह का आयोजन केयूएफओएस, कोच्चि में किया गया, जिसमें प्रो. डॉ.ए. बिजू कुमार, कुलपति, केयूएफओएस, प्रो. डॉ. दिनेश कैप्पिली, रजिस्ट्रार, केयूएफओएस, विश्वविद्यालय के अधिकारी तथा भाकृअनुप-एनबीएफजीआर के प्रतिनिधि, जिनमें डॉ. काजल चक्रवर्ती, निदेशक, भाकृअनुप-एनबीएफजीआर की तथा डॉ. टी.टी. अजित कुमार, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख, भाकृअनुप-एनबीएफजीआर, कोच्चि क्षेत्रीय केन्द्र, सहित केन्द्र के वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर प्रो. डॉ. ए. बिजू कुमार ने संरक्षण और सतत उपयोग के लिए प्रायद्वीपीय भारत के स्वदेशी मत्स्य आनुवंशिक संसाधनों पर अनुसंधान में तालमेल स्थापित करने हेतु इस साझेदारी के महत्व पर प्रकाश डाला।

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डॉ. काजल चक्रवर्ती ने मत्स्य क्षेत्र में उभरती चुनौतियों और अवसरों का समाधान करने तथा ब्लू इकोनॉमी में योगदान देने के लिए सहयोगात्मक अनुसंधान, शैक्षणिक आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और नवाचार की अपार संभावनाओं पर जोर दिया।

यह सहयोग संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रमों, छात्र एवं संकाय अंतःक्रिया/आदान-प्रदान, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण पहलों तथा जलीय आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण और सतत उपयोग के लिए नवीन प्रौद्योगिकियों के विकास को सुगम बनाने की अपेक्षा रखता है।

यह साझेदारी जैव विविधता संरक्षण, सतत मत्स्य विकास तथा एक सुदृढ़ और ज्ञान-आधारित ब्लू इकोनॉमी के माध्यम से विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने की परिकल्पना करती है।

(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, लखनऊ)

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