14 मई, 2026, जबलपुर
वर्ष 2025-26 के दौरान एआईसीआरपी-वीड प्रबंधन केन्द्रों की प्रगति की समीक्षा तथा आगामी दो वर्षों के लिए नए तकनीकी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने हेतु एआईसीआरपी वीड मैनेजमेंट की XXXIII वार्षिक समीक्षा बैठक 12-14 मई, 2026 के दौरान इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. ए.के. नायक, उप-महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), ने सतत खाद्य प्रणाली में खरपतवार प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने खरपतवार प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न समस्याओं एवं चुनौतियों का उल्लेख करते हुए पारिस्थितिकीय खरपतवार प्रबंधन तथा सुदृढ़ डेटा प्रबंधन प्रणाली, जिसमें डेटा संग्रहण, संधारण, भंडारण एवं प्रसारण शामिल हैं, पर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आगे कहा कि खरपतवार प्रबंधन में मौजूद महत्वपूर्ण अंतरालों की पहचान कर उसी के अनुरूप नए कार्यक्रमों की योजना बनाई जानी चाहिए। प्राकृतिक/जैविक खेती प्रणालियों, संरक्षण कृषि, डायरेक्ट-सीडेड धान, प्रिसीजन वीड मैनेजमेंट, ड्रोन द्वारा शाकनाशी छिड़काव हेतु मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के विकास तथा मिट्टी, जल, खाद्य श्रृंखला एवं पर्यावरण पर शाकनाशियों के प्रभाव के अध्ययन जैसे प्रमुख मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

डॉ. गिरीश चंदेल, कुलपति, आईजीकेवी, रायपुर ने किसानों के अनुकूल एवं पर्यावरण हितैषी खरपतवार प्रबंधन तकनीकों के विकास पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर शाकनाशियों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए उनका विवेकपूर्ण उपयोग अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. राकेश कुमार, सहायक महानिदेशक (एग्रोनॉमी, एग्रोफॉरेस्ट्री एवं जलवायु परिवर्तन) तथा विशिष्ट अतिथि ने एआईसीआरपी-वीएम केन्द्रों को उनके योगदान के लिए बधाई दी तथा पिछले पाँच दशकों में उत्पन्न अनुसंधान आंकड़ों के व्यवस्थित संकलन, संधारण एवं संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि उन्हें आईसीएआर की डेटा नीति के अनुरूप सुरक्षित रखा जा सके।
डॉ. पी.के. राय, निदेशक, आईसीएआर-राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान एवं विशिष्ट अतिथि ने फसल उत्पादन में खरपतवार प्रबंधन को एक प्रमुख जैविक तनाव के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने तिलहनी फसलों में सतत खरपतवार प्रबंधन तकनीकों के विकास पर जोर दिया।
डॉ. वी.के. त्रिपाठी, अनुसंधान निदेशक, आईजीकेवी, रायपुर ने अपने स्वागत उद्बोधन में छत्तीसगढ़ में कम फसल उत्पादकता, सीमित फसल विविधीकरण एवं कम कृषि आय जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य के लगभग दो-तिहाई कृषि क्षेत्र में धान की खेती होती है तथा खरपतवार एक प्रमुख जैविक बाधा बने हुए हैं, जिससे राज्य को प्रतिवर्ष ₹10,000 करोड़ से अधिक की हानि होती है।

इससे पूर्व, डॉ. जे.एस. मिश्रा, निदेशक, आईसीएआर-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय ने विभिन्न फसलों एवं फसल प्रणालियों में खरपतवारों से होने वाली उपज हानि को कम करने हेतु खरपतवार प्रबंधन तकनीकों के विकास एवं प्रसार में एआईसीआरपी-वीएम केन्द्रों की भूमिका का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने खरपतवारों में शाकनाशी प्रतिरोध जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने तथा प्राकृतिक खेती, पुनर्योजी कृषि एवं संरक्षण कृषि के लिए उन्नत उपकरणों एवं तकनीकों के माध्यम से प्रभावी खरपतवार प्रबंधन समाधान विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर खरपतवार प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर आधारित दस प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया।
उद्घाटन कार्यक्रम में विभिन्न एआईसीआरपी-वीएम केन्द्रों के प्रधान अन्वेषकों एवं वैज्ञानिकों, आईसीएआर-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय तथा अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों, राज्य सरकार के अधिकारियों, शाकनाशी उद्योगों के प्रतिनिधियों, आईजीकेवी रायपुर के संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों सहित 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय)







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