23 जून, 2026, श्री विजय पुरम
भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीआईएआरआई), श्री विजय पुरम ने आज अपना 49वां स्थापना दिवस मनाया। सुश्री पल्लवी सरकार, आईएएस, सचिव (कृषि, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाएं तथा मत्स्य), अंडमान एवं निकोबार प्रशासन, कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थीं। नाबार्ड के महाप्रबंधक श्री के. विजयपांडियन विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। स्थापना दिवस व्याख्यान भाकृअनुप, नई दिल्ली के उपमहानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. ए.के. नायक द्वारा दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. जय सुंदर, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएआरआई, ने की।
अपने मुख्य अतिथि संबोधन में सुश्री पल्लवी सरकार ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के विकास और प्रगति में आईसीएआर-सीआईएआरआई के महत्वपूर्ण योगदान के लिए संस्थान को बधाई दी। उन्होंने कहा कि जहां अनेक आईसीएआर संस्थान किसी एक विशिष्ट क्षेत्र पर केंद्रित हैं, वहीं आईसीएआर-सीआईएआरआई फसल उत्पादन, पशु विज्ञान, मत्स्य, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और ग्रामीण विकास सहित द्वीपीय कृषि के सभी पहलुओं पर कार्य करता है।

संस्थान के स्वर्ण जयंती वर्ष की ओर अग्रसर होने के अवसर पर उन्होंने द्वीपीय पारिस्थितिकी तंत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप प्रौद्योगिकियों और समाधानों के विकास हेतु किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने आने वाले वर्षों के लिए संस्थान की तीन प्रमुख प्राथमिकताओं पर बल दिया। पहला, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संस्थान की "एक दिन, एक प्रौद्योगिकी" सोशल मीडिया पहल के माध्यम से प्रसारित की जा रही प्रौद्योगिकियां द्वीपों के प्रत्येक किसान तक पहुंचनी चाहिए, ताकि कोई भी किसान इससे वंचित न रह जाए।
दूसरा, उन्होंने ग्रामीण युवाओं के लिए आजीविका के अवसर बढ़ाने हेतु कौशल विकास, उद्यमिता संवर्धन और स्टार्टअप सृजन के माध्यम से बेरोजगारी की समस्या का समाधान करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। तीसरा, उन्होंने जलवायु-अनुकूल कृषि के महत्व को रेखांकित करते हुए संस्थान से कृषि, पशु विज्ञान, मत्स्य और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से संबंधित अपने अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों में जलवायु अनुकूलन रणनीतियों को एकीकृत करने का आह्वान किया, ताकि द्वीपों में सतत कृषि विकास सुनिश्चित किया जा सके।
स्थापना दिवस व्याख्यान देते हुए डॉ. ए.के. नायक ने कृषि विकास के प्रति भाकृअनुप-सीआईएआरआई के 360 डिग्री दृष्टिकोण और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के कृषक समुदाय के प्रति उसकी समर्पित सेवा की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थान ने अपने अनुसंधान, प्रौद्योगिकियों और विस्तार प्रयासों के माध्यम से द्वीपों के किसानों की आजीविका में स्पष्ट और गुणात्मक सुधार लाया है। स्थापना दिवस को संस्थान का "जन्मदिन" बताते हुए उन्होंने कहा कि यह अवसर केवल उपलब्धियों का उत्सव मनाने का ही नहीं, बल्कि शेष चुनौतियों और कृषक समुदाय को अभी प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर आत्ममंथन करने का भी अवसर है।
भूमि, जल और प्राकृतिक संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते दबाव को रेखांकित करते हुए उन्होंने नवोन्मेषी और विज्ञान-आधारित समाधानों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने संस्थान से एल नीनो घटनाओं के कारण होने वाली विलंबित मानसून जैसी उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए भाकृअनुप-सीआरआईडीए के राष्ट्रीय आकस्मिक योजना प्रयासों के समान द्वीपों के लिए एक समग्र और क्रियाशील आकस्मिक योजना विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने स्थान-विशिष्ट आजीविका मॉडल विकसित करने, मुख्य भूमि पर निर्भरता कम करने के लिए खाद्य एवं पोषण आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने तथा शहरीकरण, पर्यटन विस्तार और संसाधनों पर बढ़ते दबावों को ध्यान में रखते हुए एक सुदृढ़ राज्य कार्य योजना–2047 तैयार करने का भी आह्वान किया, जिसमें स्पष्ट रूप से ऐसे अनुसंधान एवं विकास पर ध्यान केंद्रित हो, जो समाज पर दृश्यमान और स्थायी प्रभाव डाल सके।
अपने संबोधन में श्री के. विजयपांडियन ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि अनुसंधान की वास्तविक सफलता तभी है, जब प्रौद्योगिकियां जमीनी स्तर तक किसानों तक पहुंचें और उनकी आजीविका में सुधार तथा सामाजिक-आर्थिक उत्थान में योगदान दें। उन्होंने अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों के अधिक व्यावसायीकरण की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि उनका लाभ व्यापक कृषक समुदाय तक पहुंच सके। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के सात उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकरण प्राप्त होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पूर्ण क्षमता का लाभ उठाने और द्वीपों के किसानों के लिए अधिक आय के अवसर सृजित करने हेतु उनका व्यावसायिक उपयोग आवश्यक है। उन्होंने द्वीपीय कृषि के विकास में आईसीएआर-सीआईएआरआई के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और हितधारकों को उनकी उपलब्धियों और योगदान के लिए बधाई दी।

इससे पूर्व डॉ. जय सुंदर ने संस्थान की उपलब्धियों को प्रस्तुत करते हुए अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में सतत कृषि विकास में इसके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने संस्थान के कर्मचारियों के समर्पण की सराहना की और द्वीपीय जैव विविधता संरक्षण, फसल, बागवानी एवं पशुधन उत्पादकता वृद्धि, एकीकृत कृषि प्रणाली, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, फसलोत्तर प्रौद्योगिकी, नीति समर्थन अनुसंधान और उद्यमिता विकास से संबंधित प्रमुख अनुसंधान एवं विकास पहलों का उल्लेख किया।
उन्होंने जानकारी दी कि धान, मूंग, उड़द, बैंगन, मलाबार इमली और तेजपत्ता सहित 18 फसल किस्मों को राज्य किस्म विमोचन समिति द्वारा विमोचन के लिए अनुशंसित किया गया है। उन्होंने सफल एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडलों, स्वीकृत पेटेंट एवं डिजाइनों के माध्यम से संस्थान की बढ़ती बौद्धिक संपदा संपदा तथा खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत द्वीपों में संतुलित उर्वरीकरण और सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। डॉ. जय सुंदर ने कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और लक्षद्वीप स्थित क्षेत्रीय केंद्र के महत्वपूर्ण योगदान को भी स्वीकार किया।
इस अवसर पर बागवानी एवं फसल सुधार, खेत फसलों तथा कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के प्रभागों द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों, फसल किस्मों, सब्जियों और नवाचारों को प्रदर्शनी एवं प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। एक किसान-वैज्ञानिक संवाद सत्र का भी आयोजन किया गया, जिससे किसानों को अपने अनुभव साझा करने, क्षेत्रीय स्तर की चुनौतियों पर चर्चा करने तथा अपनी कृषि गतिविधियों की उत्पादकता और स्थिरता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक मार्गदर्शन एवं व्यावहारिक समाधान प्राप्त करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के दौरान तकनीकी बुलेटिनों और सूचना पुस्तिकाओं सहित छह प्रकाशनों का विमोचन किया गया। अंडमान एवं निकोबार तथा लक्षद्वीप द्वीप समूह के प्रगतिशील किसानों को भाकृअनुप-सीआईएआरआई की प्रौद्योगिकियों को सफलतापूर्वक अपनाने और प्रसारित करने के लिए सम्मानित किया गया। प्रौद्योगिकी विकास एवं व्यावसायीकरण, क्षेत्रीय प्रयोगों के संचालन, शोध प्रकाशनों, अनुभागीय प्रदर्शन तथा संस्थान की समग्र सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों और कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया।
इससे पूर्व गणमान्य अतिथियों ने संस्थान की बौनी नारियल किस्मों के पौधरोपण अभियान में भाग लिया तथा द्वीपीय कृषक समुदायों के लाभ के लिए आईसीएआर-सीआईएआरआई द्वारा विकसित विभिन्न फसल किस्मों, प्रौद्योगिकियों और नवाचारों को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनियों का अवलोकन किया।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजय पुरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह)







फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें