23–24 जुलाई, 2026, नई दिल्ली
भारत विश्व के अग्रणी कृषि उत्पादक देशों में से एक रहा है, जो प्रतिवर्ष लगभग 357 मिलियन टन खाद्यान्न, 27 मिलियन टन दलहन, 16 मिलियन टन मोटे अनाज (मिलेट्स) तथा 315 मिलियन टन से अधिक फल एवं सब्जियों का उत्पादन करता है। कृषि क्षेत्र राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 18 प्रतिशत योगदान देता है, जबकि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र कृषि जीडीपी में 7–8 प्रतिशत का योगदान करते हुए 23 लाख से अधिक उद्यमों का समर्थन करता है तथा 70 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है। इसके बावजूद, 6–18 प्रतिशत के बीच होने वाली फसलोत्तर हानियां एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, जो भंडारण, पैकेजिंग, संरक्षण, परिवहन और मूल्य संवर्धन में उन्नत प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
पैकेजिंग कृषि मूल्य श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण घटक बनकर उभरी है और वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था का पांचवां सबसे बड़ा क्षेत्र है, जो 26.7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ रहा है तथा जिसका अनुमानित मूल्य 84–102 अरब अमेरिकी डॉलर है। वैश्विक स्तर पर पैकेजिंग उद्योग का मूल्य लगभग 1.14 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है और इसके वर्ष 2034 तक 1.59 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग प्रणालियां उत्पाद की गुणवत्ता, सुरक्षा, शेल्फ लाइफ और ट्रेसबिलिटी बढ़ाने की अपनी क्षमता के कारण तेजी से महत्वपूर्ण होती जा रही हैं। जहां सक्रिय पैकेजिंग पैकेज के आंतरिक वातावरण को परिवर्तित करके शेल्फ लाइफ बढ़ाती है, वहीं इंटेलिजेंट पैकेजिंग फसलोत्तर मूल्य श्रृंखला के दौरान उत्पाद की गुणवत्ता संबंधी जानकारी की निगरानी और संप्रेषण करती है।
इन प्रौद्योगिकियों के बढ़ते महत्व को देखते हुए, भाकृअनुप–केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (भाकृअनुप-सीआईएई), भोपाल ने भारतीय पैकेजिंग संस्थान (आईआईपी), दिल्ली के सहयोग से 23–24 जुलाई 2026 को आईआईपी, दिल्ली में “कृषि उत्पादों के लिए स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग प्रणालियों के सामंजस्यीकरण” विषय पर दो दिवसीय मंथन सत्र का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम में प्रख्यात वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों, उद्यमियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया तथा स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग प्रौद्योगिकियों में हालिया प्रगति, चुनौतियों और भावी रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में आईसीएआर संस्थानों, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (एसएयू) और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के 18 प्रतिनिधियों के साथ-साथ 17 अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिससे राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर सार्थक सहयोग को बढ़ावा मिला। विचार-विमर्श का मुख्य केन्द्र फसलोत्तर हानियों में कमी, खाद्य गुणवत्ता एवं सुरक्षा में सुधार, शेल्फ लाइफ बढ़ाने, सतत पैकेजिंग समाधानों को प्रोत्साहन देने तथा कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने पर रहा।
आईआईपी दिल्ली के अतिरिक्त निदेशक एवं क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. तनवीर आलम ने खाद्य गुणवत्ता, स्थिरता, बाजार प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता विश्वास सुनिश्चित करने में नवोन्मेषी पैकेजिंग प्रौद्योगिकियों के बढ़ते महत्व पर बल दिया।
उद्घाटन सत्र में कई विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। प्रो. जे.पी. शर्मा, पूर्व कुलपति, शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय-जम्मू (एसकेयूएएसटी-जम्मू) ने सम्मानित अतिथि के रूप में संबोधन दिया और अगली पीढ़ी की स्मार्ट पैकेजिंग प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए बहुविषयक अनुसंधान, संस्थागत सहयोग और नीतिगत समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. कैरम नरसैया, एडीजी (प्रोसेस इंजीनियरिंग) एवं कार्यवाहक निदेशक, भाकृअनुप-आईएएसआरआई, नई दिल्ली, ने इंटेलिजेंट पैकेजिंग प्रणालियों को आगे बढ़ाने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और परिशुद्ध कृषि के एकीकरण के महत्व को रेखांकित किया।
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए प्रो बलदेव राज कम्बोज, कुलपति, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने स्वदेशी पैकेजिंग नवाचारों के व्यावसायीकरण, उद्योग–शिक्षा जगत साझेदारी को सुदृढ़ करने तथा किसान-केंद्रित प्रौद्योगिकी विकास पर बल दिया।
श्री प्रवीण मलिक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एग्रो इनोवेट इंडिया लिमिटेड (आईसीएआर इकाई), ने प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण, स्टार्टअप प्रोत्साहन, बौद्धिक संपदा प्रबंधन और अनुसंधान नवाचारों के प्रभावी हस्तांतरण के लिए रणनीतियों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा की गई कि विभिन्न संस्थानों में स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग पर चल रही अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों की एक समेकित रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसके पश्चात एक श्वेत पत्र (व्हाइट पेपर) प्रकाशित किया जाएगा। साथ ही, संभावित वित्तीय सहायता प्राप्त करने हेतु प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय को प्रस्तुत किए जाने वाले बड़े पैमाने के सहयोगात्मक परियोजनाओं के निर्माण की आवश्यकता पर भी बल दिया गया, जिनका समन्वय भाकृअनुप–सीआईएई, भोपाल द्वारा किया जाएगा।
पहले दिन आयोजित दो तकनीकी सत्रों में भाकृअनुप-एनडीआरआई, करनाल; भारतीय पैकेजिंग संस्थान (आईआईपी), दिल्ली; भाकृअनुप–सीआईएई, भोपाल; भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली; सीएसआईआर-सीएफटीआरआई, मैसूर; भाकृअनुप-सीआईएफटी, कोच्चि; भाकृअनुप-एनआरसी ऑन मीट; एसकेयूएएसटी-कश्मीर; तथा पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के वैज्ञानिकों ने विशेषज्ञ प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों में स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग सामग्री, ताजगी संकेतक, जैव-अवक्रमणीय एवं सक्रिय पैकेजिंग प्रणालियां, गुणवत्ता निगरानी उपकरण, सेंसर आधारित प्रौद्योगिकियां तथा उभरते व्यावसायीकरण अवसरों को शामिल किया गया। वक्ताओं ने अपने-अपने संस्थानों में विकसित प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया, उनके प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (टीआरएल), व्यावसायीकरण की स्थिति तथा अनुसंधान एवं औद्योगिक अंतरालों पर चर्चा की, जिनके लिए सहयोगात्मक हस्तक्षेप आवश्यक हैं।
मंथन सत्र के दूसरे दिन की अध्यक्षता डॉ. अलका राव, निदेशक, सीएसआईआर-आईएमटेक, चंडीगढ़ ने की। कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा चार मौखिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिसके पश्चात बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के एक वैज्ञानिक द्वारा आमंत्रित व्याख्यान प्रस्तुत किया गया।
उद्योग प्रतिनिधियों ने इंटेलिजेंट पैकेजिंग के व्यावसायीकरण अवसरों, ताजगी संकेतकों की बाजार मांग, जैव-अवक्रमणीय प्लास्टिक, परीक्षण पद्धतियों, सामग्री संरचना तथा माइक्रोप्लास्टिक से संबंधित चिंताओं पर अपने विचार साझा किए।

एक पैनल चर्चा में शिक्षा जगत और उद्योग के विशेषज्ञों ने खाद्य पैकेजिंग में उभरते रुझानों और चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। चर्चा में व्यावसायीकरण के मार्ग, प्रौद्योगिकी मानकीकरण एवं लेबलिंग, जैव-अवक्रमणीय और सेलूलोज आधारित पैकेजिंग सामग्री, एंजाइम आधारित पैकेजिंग प्रणालियां, क्यूआर कोड आधारित ट्रेसबिलिटी, किफायती पैकेजिंग प्रौद्योगिकियां तथा खाद्य उद्योग की बदलती आवश्यकताओं को पूरा करने की रणनीतियों पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम का समापन 24 जुलाई, 2026 को आयोजित समापन सत्र के साथ हुआ, जिसमें डॉ. सी.एन. रविशंकर, सदस्य, कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड (एएसआरबी), मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कृषि उत्पादों के लिए स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग प्रौद्योगिकियों के विकास और व्यावसायीकरण में तेजी लाने हेतु शिक्षा जगत, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
यह मंथन सत्र स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग प्रणालियों के भविष्य पर ज्ञान आदान-प्रदान और रणनीतिक विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच सिद्ध हुआ। विचार-विमर्श से प्राप्त अनुशंसाओं से अनुसंधान सहयोग को सुदृढ़ करने, प्रौद्योगिकी विकास में तेजी लाने, मानकीकरण और व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने तथा सतत पैकेजिंग समाधानों को अपनाने में सहायता मिलने की अपेक्षा है। ये परिणाम फसलोत्तर हानियों को कम करने, खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता में सुधार करने, शेल्फ लाइफ बढ़ाने तथा भारत के कृषि क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता और स्थिरता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल)







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