30 जुलाई, 2026, गुवाहाटी
अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान एवं प्रबंधन में उभरती प्रौद्योगिकियों के एकीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, भाकृअनुप–केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सिफरी), क्षेत्रीय केन्द्र, गुवाहाटी ने ड्रोन टेक लैब, गुवाहाटी के सहयोग से आज “मत्स्य संसाधन प्रबंधन में ड्रोन के अनुप्रयोग” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में असम राज्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग केन्द्र (एएसएसएसी), गुवाहाटी के निदेशक डॉ. पी.एल.एन. राजू द्वारा किया गया। प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए डॉ. सुल्लिप कुमार माझी ने मत्स्य अनुसंधान में ड्रोन प्रौद्योगिकी के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से त्वरित संसाधन आकलन, आवास मानचित्रण तथा अंतर्देशीय खुले जल पारिस्थितिकी तंत्रों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए।
यह कार्यशाला भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, बैरकपुर के निदेशक डॉ. प्रदीप डे के मार्गदर्शन में आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य मत्स्य पेशेवरों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को अंतर्देशीय मत्स्य संसाधनों के सतत प्रबंधन के लिए ड्रोन प्रौद्योगिकी के बढ़ते अनुप्रयोगों से परिचित कराना था।
इस अवसर पर अपने संदेश में डॉ. प्रदीप डे ने कहा, “अंतर्देशीय मत्स्य प्रबंधन का भविष्य उन्नत प्रौद्योगिकियों और वैज्ञानिक ज्ञान के बुद्धिमत्तापूर्ण एकीकरण में निहित है। ड्रोन-आधारित निगरानी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तथा भू-स्थानिक उपकरणों के साथ मिलकर, जलीय पारिस्थितिकी तंत्रों के वास्तविक समय आकलन, सटीक संसाधन प्रबंधन तथा साक्ष्य-आधारित निर्णय-निर्माण के लिए अपार संभावनाएँ प्रदान करती है। इन उभरती प्रौद्योगिकियों में मत्स्य पेशेवरों की क्षमता निर्माण, सतत एवं जलवायु-लचीले मत्स्य विकास को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।”
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने स्मार्ट, डेटा-आधारित मत्स्य प्रबंधन प्रणालियों के विकास हेतु ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, जो संसाधन निगरानी, विश्लेषण एवं निर्णय-निर्माण में सुधार करने में सक्षम हों।

उद्घाटन संबोधन में मत्स्य एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में ड्रोन, भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तथा उपग्रह-आधारित दूरसंवेदी तकनीकों की पूरक भूमिकाओं पर प्रकाश डाला गया। प्रभावी पर्यावरणीय निगरानी के लिए उनके अनुप्रयोगों की व्याख्या की गई, साथ ही स्काईरूट एयरोस्पेस की पहलों की जानकारी भी दी गई। प्रतिभागियों को भू-स्थानिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए असम सरकार द्वारा राज्य उपग्रह प्रक्षेपित करने के प्रस्ताव से भी अवगत कराया गया।
तकनीकी सत्र में अंतर्देशीय मत्स्य संसाधनों एवं उभरती प्रौद्योगिकियों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। प्रस्तुतियों में पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र के अंतर्देशीय खुले जल संसाधनों को शामिल किया गया, जिनमें उनकी विविधता, वर्तमान स्थिति एवं प्रबंधन संबंधी चुनौतियों को रेखांकित किया गया। भारत के अंतर्देशीय खुले जल क्षेत्रों में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की वैज्ञानिक रणनीतियों पर भी चर्चा की गई, साथ ही जल गुणवत्ता निगरानी, जलीय आवास मूल्यांकन, मत्स्य भंडार निगरानी तथा सटीक मत्स्य प्रबंधन के लिए भाकृअनुप-सीआईएफआरआई द्वारा विकसित एवं उपयोग की जा रही ड्रोन एवं IoT आधारित प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम में व्यावहारिक आयाम जोड़ते हुए, ड्रोन टेक लैब के श्री सौविक भूनिया ने ड्रोन प्लेटफॉर्मों तथा उनके हवाई मानचित्रण, GIS एकीकरण, जलीय आवास मूल्यांकन, जल गुणवत्ता निगरानी एवं मत्स्य संसाधन सर्वेक्षण में अनुप्रयोगों का प्रदर्शन किया। तकनीकी सत्रों का समापन एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ, जिससे प्रतिभागियों को मत्स्य अनुसंधान, निगरानी तथा अंतर्देशीय जलीय संसाधनों के सतत प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए ड्रोन प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में कुल 34 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें वैज्ञानिक, तकनीकी कार्मिक, मत्स्य पेशेवर तथा कॉलेज ऑफ फिशरीज, असम कृषि विश्वविद्यालय (AAU), राहा, नगांव के विद्यार्थी शामिल थे।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)







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