भाकृअनुप-सीसीआरआई, नागपुर ने 42वां स्थापना दिवस मनाया; प्रगतिशील सिट्रस उत्पादकों को किया सम्मानित

भाकृअनुप-सीसीआरआई, नागपुर ने 42वां स्थापना दिवस मनाया; प्रगतिशील सिट्रस उत्पादकों को किया सम्मानित

28 जुलाई, 2026, नागपुर

भाकृअनुप–केन्द्रीय सिट्रस अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीसीआरआई), नागपुर, ने भारत के सिट्रस क्षेत्र को आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को पुनः रेखांकित करते हुए अपना 42वां स्थापना दिवस मनाया। संस्थान के प्रशिक्षण सभागार में आयोजित इस स्मरणीय कार्यक्रम में डॉ. शरद आर. गडाख, कुलपति, डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ (पीडीकेवी), अकोला, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

डॉ. वी.एन. वाघमारे, निदेशक, भाकृअनुप–केन्द्रीय कपास अनुसंधान संस्थान, नागपुर तथा डॉ. एन.जी. पाटिल, निदेशक, भाकृअनुप–राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग योजना ब्यूरो, नागपुर, कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. दिलीप घोष, निदेशक, भाकृअनुप-सीसीआरआई, नागपुर, ने की। उनकी उपस्थिति ने बागवानी अनुसंधान और राष्ट्रीय कृषि विकास को आगे बढ़ाने में संस्थान के योगदान के महत्व को रेखांकित किया।

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. शरद आर. गडाख ने सिट्रस अनुसंधान में भाकृअनुप-सीसीआरआई की अग्रणी भूमिका की सराहना की तथा नवाचार को गति देने और ग्रामीण परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान–शिक्षा–उद्योग सहयोग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।

ICAR-CCRI, Nagpur Celebrates 42nd Foundation Day; Progressive Citrus Growers Honoured

डॉ. वी. एन. वाघमारे ने सिट्रस-आधारित कृषि प्रणालियों की लचीलापन क्षमता और लाभप्रदता बढ़ाने में एकीकृत एवं बहु-विषयक अनुसंधान के महत्व पर जोर दिया।

डॉ. एन. जी. पाटिल ने सिट्रस खेती की दीर्घकालिक स्थिरता और उत्पादकता सुनिश्चित करने में मृदा स्वास्थ्य तथा वैज्ञानिक भूमि उपयोग प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

विशिष्ट अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए डॉ. दिलीप घोष ने सिट्रस अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास में संस्थान की चार दशक से अधिक की उल्लेखनीय यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने भाकृअनुप-सीसीआरआई की प्रमुख उपलब्धियों का व्यापक विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें उन्नत सिट्रस किस्मों का विकास, एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन प्रौद्योगिकियां, रोगमुक्त रोपण सामग्री का उत्पादन तथा फसलोपरांत प्रबंधन एवं प्रसंस्करण में प्रगति शामिल है। डॉ. घोष ने साइट्रस उत्पादकता बढ़ाने, फलों की गुणवत्ता में सुधार करने तथा सतत और जलवायु-लचीली कृषि की राष्ट्रीय दृष्टि के अनुरूप निर्यात क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संस्थान की रणनीतिक कार्ययोजना का भी उल्लेख किया।

ICAR-CCRI, Nagpur Celebrates 42nd Foundation Day; Progressive Citrus Growers Honoured

समारोह का एक प्रमुख आकर्षण महाराष्ट्र, तेलंगाना और मध्य प्रदेश के पांच प्रगतिशील सिट्रस उत्पादकों का सम्मान था। इन पुरस्कार विजेताओं को वाणिज्यिक सिट्रस खेती, गुणवत्तापूर्ण नर्सरी प्रबंधन तथा वैज्ञानिक खेती पद्धतियों को अपनाने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान अनुसंधान–प्रसार संबंधों और किसान-नेतृत्व वाले नवाचार के सफल प्रभाव को दर्शाता है।

स्थापना दिवस समारोह ने हितधारक सहभागिता और संस्थागत सहयोग के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को भी उजागर किया। मुख्य कार्यक्रम से पूर्व आयोजित सप्ताहभर की शैक्षणिक एवं खेल गतिविधियों की श्रृंखला में वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे सीखने, सहयोग और उत्सव का वातावरण बना। स्थापना दिवस प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया तथा कार्यक्रम के दौरान पुरस्कार वितरित किए गए।

जैसे-जैसे भाकृअनुप-सीसीआरआई अपने पांचवें दशक की ओर अग्रसर हो रहा है, 42वें स्थापना दिवस समारोह ने न केवल संस्थान की समृद्ध विरासत का स्मरण कराया, बल्कि अनुसंधान में उत्कृष्टता, समावेशी हितधारक सहभागिता, नवाचार एवं सतत विकास के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सिट्रस क्षेत्र के निर्माण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की भी पुनर्पुष्टि की।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय सिट्रस अनुसंधान संस्थान, नागपुर)

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