भाकृअनुप-आईआईएमआर, हैदराबाद ने एससी/एसटी ग्रेजुएट्स के लिए उच्च स्तरीय जीववैज्ञानिक प्रयोगशाला तकनीकें तथा श्री अन्न-आधारित खाद्य उद्योग में स्पेशलाइज्ड एंटरप्रेन्योरशिप हेतु क्षमता विकास मापदंड का किया विकास

भाकृअनुप-आईआईएमआर, हैदराबाद ने एससी/एसटी ग्रेजुएट्स के लिए उच्च स्तरीय जीववैज्ञानिक प्रयोगशाला तकनीकें तथा श्री अन्न-आधारित खाद्य उद्योग में स्पेशलाइज्ड एंटरप्रेन्योरशिप हेतु क्षमता विकास मापदंड का किया विकास

15 दिसंबर, 2025

भाकृअनुप–भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान, जो श्री अन्न अनुसंधान में ग्लोबल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (जीसीओई) है, राजेन्द्रनगर, हैदराबाद, ने आज दो गहन 10-दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्घाटन किया। अपनी तरह के ये पहले प्रशिक्षण कार्यक्रम दो अलग-अलग मॉड्यूल के साथ हैं: एक, जिसे विभिन्न जैविक उद्योग की ज़रूरतों के लिए अत्यधिक उन्नत प्रयोगशाला तकनीकों एवं उपकरणों को संभालने का कौशल प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और दूसरा, जिसे बाजरा प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन तथा विपणन में छात्रों को उद्यमिता में प्रशिक्षित करने के लिए तैयार किया गया है, जो पोषक अनाज क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देता है।

15 – 26 दिसंबर, 2025 के दौरान ट्रेनिंग के पहले बैच के सफल समापन पर, भाकृअनुप-आईआईएमआर की डायरेक्टर डॉ. सी. तारा सत्यवती ने भारत के बढ़ते श्री अन्न इकोसिस्टम के लिए कुशल मानव संसाधन विकसित करने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि श्री अन्न के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के बाद श्री अन्न को वैश्विक पहचान मिलने से, प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग और कमर्शियलाइज़ेशन में इनोवेशन लाने में सक्षम प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स और उद्यमियों की मांग बढ़ रही है।

पहला प्रोग्राम, “जीनोमिक्स, टिश्यू कल्चर, माइक्रोस्कोपी और ग्रेन साइंस में एडवांस्ड लेबोरेटरी तकनीकें” था, जिसमें टिश्यू और खाद्य उत्पादों के पोषक तत्व विश्लेषण तकनीक, क्रोमैटोग्राफी, स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री, फर्मेंटेशन, कीट फेरोमोन, रोग टीकाकरण तकनीक, प्लांट टिश्यू कल्चर, माइक्रोबियल आइसोलेशन, मॉलिक्यूलर बायोलॉजी तथा जीनोमिक्स तकनीक, एवं एडवांस्ड माइक्रोस्कोपी तकनीकों सहित लेबोरेटरी की कई क्षमताओं को शामिल किया गया था। इस शेड्यूल में विशेषज्ञ वैज्ञानिकों द्वारा हैंड्स-ऑन सेशन शामिल हैं, जो प्रतिभागियों को वैज्ञानिक बुनियाद और कमर्शियल और औद्योगिक अनुप्रयोगों की जानकारी प्रदान करते हैं।

इसके साथ ही, भाकृअनुप-आईआईएमआर ने "न्यूट्रि-सीरियल्स एंटरप्रेन्योरशिप फाउंडेशन प्रोग्राम" नाम का दूसरा प्रोग्राम शुरू किया है, जिसे बाजरा वैल्यू चेन में पहली पीढ़ी के उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। सेशन में श्री अन्न-आधारित खाद्य टेक्नोलॉजी, रेगुलेटरी और लेबलिंग ज़रूरतों, फंडिंग के तरीकों तथा सरकारी योजनाओं, ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग रणनीतियों, एक्सपोर्ट के अवसरों और इंडस्ट्रियल विजिट के बारे में जानकारी दी जाती है। इस प्रोग्राम में श्री अन्न वैल्यू-एडिशन टेक्नोलॉजी पर डेमो और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग भी शामिल हैं।

दोनों प्रोग्राम आईआईएमआर के वैज्ञानिकों और रिसर्च स्टाफ की मल्टीडिसीप्लिनरी टीमों द्वारा कोऑर्डिनेट किए जाते हैं, जिसमें अनाज विज्ञान, बायोटेक्नोलॉजी, प्लांट पैथोलॉजी, मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, फूड टेक्नोलॉजी और एग्रीबिजनेस सहित खास क्षेत्रों के रिसोर्स पर्सन शामिल होते हैं।

एकेडमिक संस्थानों, रिसर्च लैब्स, एग्री-स्टार्टअप और फूड-प्रोसेसिंग सेक्टर के 200 से ज़्यादा एग्रीकल्चर ग्रेजुएट्स ने इन प्रोग्राम्स के लिए एनरोल किया है, जिसका मकसद स्किल्स की कमी को पूरा करना और श्री अन्न के लिए साइंटिफिक और एंटरप्रेन्योरल इकोसिस्टम को बेहतर बनाना है। ये प्रोग्राम जीसीओई-डीएपीएससी/डीएपीएसटीफंडिंग के तहत अनुसूचित जाती और अनुसूचित जनजाती समुदाय के स्टूडेंट्स के लिए पूरी तरह से मुफ्त हैं। देश भर से ट्रेनिंग के लिए रजिस्टर करने वाले सभी 200 एग्रीकल्चर स्टूडेंट्स और ग्रेजुएट्स के लिए अलग-अलग तारीखों पर इन दो ट्रेनिंग प्रोग्राम्स की एक सीरीज शेड्यूल की गई थी। हर बैच में 20 पार्टिसिपेंट्स होंगे, और इच्छुक स्टूडेंट्स आईआईएमआर वेबसाइट पर जाकर रजिस्टर कर सकते हैं।

पहले बैच की ट्रेनिंग रिपोर्ट का संक्षिप्त विवरण:

“जीनोमिक्स, टिश्यू कल्चर, माइक्रोस्कोपी और ग्रेन साइंस में एडवांस्ड लेबोरेटरी टेक्निक्स” नाम के एक ट्रेनिंग प्रोग्राम में आधुनिक लेबोरेटरी टूल्स तथा मेथोडोलॉजी का गहन प्रैक्टिकल अनुभव दिया गया।

मुख्य फोकस क्षेत्र:

• पौधों के टिशू पोषक तत्व विश्लेषण और क्रोमैटोग्राफी

• स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री तथा फर्मेंटेशन टेक्नोलॉजी

• कीट फेरोमोन विश्लेषण एवं रोग टीकाकरण तकनीकें

• प्लांट टिशू कल्चर और माइक्रोबियल आइसोलेशन

• मॉलिक्यूलर बायोलॉजी तकनीकें जिसमें डीएनए एक्सट्रैक्शन, पीसीआर, और इलेक्ट्रोफोरेसिस शामिल हैं

• एडवांस्ड माइक्रोस्कोपी और बायोलॉजिकल इमेजिंग

• बायोलॉजिकल रिसर्च में बॉयोस्टैटिसटिक्स और कृत्रिम मेधा (एआई) टूल्स का एप्लीकेशन

ट्रेनिंग के नतीजे:

• ट्रेनिंग कंटेंट और डिलीवरी से 100% प्रतिभागियों को संतुष्टि मिली

• जीनोमिक्स, माइक्रोस्कोपी, पोषक तत्व विश्लेषण और माइक्रोबियल तकनीकों में सीखने में काफी सुधार हुआ

• ट्रेनिंग के बाद के मूल्यांकन के दौरान प्रतिभागियों ने मुख्य प्रयोगशाला अवधारणाओं में उच्च दक्षता का प्रदर्शन किया

• भाकृअनुप-आईआईएमआर में प्रयोगशाला के बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक सलाह, विशेष रूप से उन्नत माइक्रोस्कोपी, जीनोमिक्स, पोषक तत्व विश्लेषण, माइक्रोबियल प्रयोगशालाओं में, को सर्वसम्मति से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली

• 40% प्रशिक्षु स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित हुए, 20% उच्च प्रोफ़ाइल जैविक रिसर्च एवं डवलपमेंट उद्योगों में अवसर तलाश रहे हैं, शेष उच्च शिक्षा का विकल्प चुनेंगे।

"पोषक अनाज - उद्यमिता फाउंडेशन कार्यक्रम" नामक एक अन्य प्रशिक्षण मॉड्यूल श्री अन्न-आधारित उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य वर्धन में उद्यमशीलता क्षमता बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया था।

मुख्य घटक:

• श्री अन्न प्रोसेसिंग एवं वैल्यू-एडिशन टेक्नोलॉजी

• लाइसेंसिंग, लेबलिंग, खाद्य सुरक्षा और रेगुलेटरी कंप्लायंस

• ब्रांडिंग, मार्केटिंग तथा एक्सपोर्ट के अवसर (एपीईडीए गाइडलाइंस सहित)

• सरकारी योजनाएं, एमएसएमई सपोर्ट तथा स्टार्टअप फंडिंग के रास्ते

• श्री अन्न रेसिपी और पैकेजिंग तकनीकों पर प्रैक्टिकल डेमोंस्ट्रेशन

• न्यूट्री हब, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स का दौरा

ट्रेनिंग के नतीजे:

• 90% से ज्यादा प्रतिभागियों ने बाजरा उद्यमों के बारे में बेहतर समझ की बात कही।

• बिज़नेस प्लानिंग, ब्रांडिंग तथा रेगुलेटरी कंप्लायंस में काफी आत्मविश्वास बढ़ा।

• ज्यादातर (80%) प्रशिक्षुओं ने बाजरा-आधारित उद्यम शुरू करने या उनका विस्तार करने की तैयारी दिखाई।

• एक्सपोज़र विज़िट और प्रैक्टिकल सेशन को बहुत फायदेमंद बताया गया।

(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)

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