पहली बार याक के दूध उत्पाद, अरुणाचल प्रदेश याक चुरपी को जीआई टैग मिला
पहली बार याक के दूध उत्पाद, अरुणाचल प्रदेश याक चुरपी को जीआई टैग मिला

चुरपी, अरुणाचली याक के दूध से तैयार की जाती है, जो अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग और तवांग जिलों में पाई जाने वाली एक अनोखी याक नस्ल है। याक के दूध से बने प्राकृतिक रूप से किण्वित दूध उत्पाद, याक चुरपी, को अरुणाचल प्रदेश के भौगोलिक संकेत (जीआई टैग) के रूप में मान्यता दी गई है।

First ever yak milk product, Arunachal Pradesh Yak Churpi, gets GI tag

भाकृअनुप-राष्ट्रीय याक अनुसंधान केन्द्र के निदेशक, डॉ. मिहिर सरकार ने कहा कि यह देश में पशुचारण उत्पादन प्रणालियों और याक पालन के लिए एक बढ़ावा देने का प्रयास है।

चुरपी, प्रोटीन का एक उत्कृष्ट स्रोत है और राज्य के वनस्पति-विहीन ठंडे और पहाड़ी क्षेत्रों में आदिवासी याक चरवाहों द्वारा सब्जियों के विकल्प के रूप में अक्सर इसका उपयोग किया जाता है। इसे सब्जी या मांस करी में भी मिलाया जाता है और आदिवासी घरों में मुख्य भोजन के रूप में चावल के साथ खाया जाता है। सरकार का कहना है कि इसे अरुणाचल प्रदेश की मूर्त सांस्कृतिक तथा जनजातीय विरासत का एक अभिन्न अंग माना जाता है।

अरुणाचली याक नस्ल का पालन आदिवासी याक चरवाहों द्वारा किया जाता है, जिन्हें ‘ब्रोकपास’ के नाम से जाना जाता है, जो गर्मियों के दौरान अपने याक के साथ ऊंचे स्थानों (10,000 फीट और उससे अधिक की ऊंचाई पर) की ओर पलायन करते हैं और सर्दियों के दौरान मध्य ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में चले जाते हैं। एनआरसी-याक के प्रधान वैज्ञानिक, डॉ. विजय पॉल, जो जीआई आवेदन प्रक्रिया से जुड़े थे, ने बताया कि, चूंकि उत्पाद इतनी ऊंचाई पर तैयार किया जाता है, इसलिए इससे जनजातीय चरवाहों को समृद्ध पोषण प्रदान करने के अलावा ठंड और हाइपोक्सिया के खिलाफ लाभ मिलने की भी उम्मीद है।

भाकृअनुप-राष्ट्रीय याक अनुसंधान केन्द्र, दिरांग ने इस अद्वितीय याक उत्पाद के पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। संस्थान अरुणाचली याक पालने वाले ब्रोकपास के साथ मिलकर काम कर रहा है और अनुसंधान और विस्तार सहायता के माध्यम से उनकी मदद कर रहा है। संस्थान द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं इस तथ्य के प्रकाश में अधिक महत्व रखती हैं कि देहाती याक पालन से जुड़ी कठिनाइयों एवं घटते लाभ के कारण पूरे देश में याक की आबादी तेजी से घट रही है। अरुणाचल प्रदेश के याक चुरपी का जीआई के रूप में पंजीकरण आने वाले समय में याक संरक्षण और याक चरवाहों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के उद्देश्य को पूरा करने में मदद करने वाला है।

(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय याक अनुसंधान केन्द्र, दिरांग)

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