सतत कृषि के लिए वर्मीकम्पोस्टिंग; भाकृअनुप–केवीके, सीसीएआरआई, गोवा द्वारा जीवंत विधि प्रदर्शन

सतत कृषि के लिए वर्मीकम्पोस्टिंग; भाकृअनुप–केवीके, सीसीएआरआई, गोवा द्वारा जीवंत विधि प्रदर्शन

29 जुलाई, 2026, गोवा

भाकृअनुप-कृषि विज्ञान केन्द्र, उत्तर गोवा, भाकृअनुप-केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीसीएआरआ), गोवा, के अंतर्गत, ने आज गुइरिम, बारदेज, उत्तर गोवा में वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन एवं उसके उपयोग पर एक कृषि विधि प्रदर्शन का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जैविक अपशिष्टों के पुनर्चक्रण तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए वैज्ञानिक वर्मीकम्पोस्टिंग को एक सतत पोषक तत्व प्रबंधन तकनीक के रूप में बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम के अंतर्गत वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन एवं उसके उपयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। प्रतिभागियों को वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने की चरणबद्ध प्रक्रिया से अवगत कराया गया, जिसमें उपयुक्त जैविक सामग्री का चयन एवं तैयारी, नमी के इष्टतम स्तर का रखरखाव, केंचुओं की गतिविधि, अपघटन प्रक्रिया तथा गुणवत्तापूर्ण वर्मीकम्पोस्ट की कटाई शामिल थी। उन्हें सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए वर्मीकम्पोस्ट के एक पर्यावरण-अनुकूल जैविक खाद के रूप में महत्व एवं लाभों के बारे में भी जागरूक किया गया।

Vermicomposting for Sustainable Agriculture; Live Method Demonstration by ICAR–KVK, CCARI, Goa

प्रदर्शन में मृदा स्वास्थ्य एवं संरचना में सुधार, कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ाने, पोषक तत्वों की उपलब्धता में वृद्धि, लाभकारी मृदा सूक्ष्मजीवों को प्रोत्साहित करने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में इसकी भूमिका को रेखांकित किया गया। विभिन्न फसलों में वर्मीकम्पोस्ट के उपयुक्त उपयोग की विधियों के बारे में भी जानकारी दी गई।

इस कार्यक्रम ने किसानों एवं विद्यार्थियों को वैज्ञानिक वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन तथा सतत कृषि में इसके उपयोग का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया। इस प्रदर्शन ने खेतों एवं घरों से निकलने वाले जैविक अपशिष्टों को मूल्यवान जैविक खाद में परिवर्तित करने हेतु पुनर्चक्रण को भी प्रोत्साहित किया, जिससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार, सतत पोषक तत्व प्रबंधन तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिलता है।

प्रदर्शन में कुल 24 प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)

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