उत्तरी पर्वतीय एवं उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों के लिए मक्का की उच्च उपज किस्म ‘वी एल मधुबाला’ तथा ‘वी एल लोफाई’ अधिसूचित

उत्तरी पर्वतीय एवं उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों के लिए मक्का की उच्च उपज किस्म ‘वी एल मधुबाला’ तथा ‘वी एल लोफाई’ अधिसूचित

12 जनवरी, 2026, अल्मोड़ा

भाकृअनुप–विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा विकसित स्वीट कॉर्न की संकर किस्म ‘वी एल मधुबाला’ तथा कम फाइटेट वाली जैव-सुदृढ़ीकृत मक्का संकर किस्म ‘वी एल लोफाई’ को देश के उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र एवं उत्तर पश्चिमी मैदानी में उपज हेतु अधिसूचित किया गया है।

 

‘वी एल मधुबाला’ संकर किस्म, मीठी मक्का पंक्ति वी एस एल 26 और वी एस एल 38 के संयोजन से विकसित की गई है। अखिल भारतीय समन्वित परीक्षणों में उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र में इसके छिले हुए हरे भुट्टों का औसत उत्पादन 11,438 किग्रा/है. तथा उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में 11,454 किग्रा/है दर्ज किया गया। वी एल मधुबाला के हरे भुट्टों की तुड़ाई 72–75 दिनों में की जा सकती है। इस किस्म में औसत कुल घुलनशील ठोस 15.7 प्रतिशत पाया गया है, जो इसे स्वाद में मधुर एवं उपभोक्ताओं के लिए आकर्षक बनाता है। इसने टर्किकम पर्ण झुलसा के प्रति मध्यम प्रतिरोध प्रदर्शित की है। वी एल मधुबाला को उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र (लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड (पर्वतीय), असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा) तथा उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा एवं दिल्ली) में खेती हेतु अधिसूचित किया गया है।

यह अधिसूचना किसानों को जल्दी तैयार होने वाली, उच्च उपज एवं उत्कृष्ट स्वाद वाली स्वीट कॉर्न किस्म उपलब्ध कराएगी, जिससे बाजार उन्मुख खेती, आय वृद्धि और सब्जी आधारित कृषि को बढ़ावा मिलेगा।

‘वी एल लोफाई’ संकर किस्म, वीबीएल 107 और वीबीएल 109 के संयोजन से विकसित की गई है। वी बी एल 107, मक्का पंक्ति वी 407 का चिन्हक सहायक चयन (MAS) आधारित कम फाइटेट संस्करण है, जबकि वी बी एल 109 को प्राप्तकर्ता लाइन वी क्यू एल 1 और कम फाइटेट दाता लाइन Lpa2 के संकरण से चिन्हक सहायक चयन तकनीक द्वारा विकसित किया गया है। वी एल लोफाई जल्दी पकने वाली (90–95 दिन) संकर किस्म है, जिसमें फाइटेट की मात्रा केवल 2.16 मिलीग्राम/ग्राम पाई जाती है। उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र में अखिल भारतीय समन्वित परीक्षणों के दौरान इसका औसत उत्पादन 6,046 किग्रा/है दर्ज किया गया। इसने टर्किकम पर्ण झुलसा के प्रति मध्यम प्रतिरोधिता प्रदर्शित की। वी एल लोफाई को पूरे उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र (लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड (पर्वतीय), असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा) में खेती हेतु अधिसूचित किया गया है।

 

फाइटिक एसिड (इनोसिटोल हेक्सा फॉस्फेट या IP6) पौधों के बीजों में पाया जाने वाला एक फॉस्फोरस भंडारण यौगिक है जो खनिजों को बांध लेता है, जिससे शरीर के लिए उनका अवशोषण कठिन हो जाता है (इसलिए इसे "एंटी-पोषक तत्व" कहा जाता है)। सामान्य मक्का में फाइटेट की औसत मात्रा लगभग 3.0 मिग्रा/ग्राम  होती है। इसकी तुलना में वी एल लोफाई में फाइटेट की मात्रा सिर्फ 2.16 मिग्रा/ग्राम है। कम फाइटेट मक्का में सामान्य मक्की की तुलना में खनिजों की जैव-उपलब्धता मक्का से अधिक होती है। जिससे यह सामान्य मक्का की तुलना में अधिक पोषक होता है।

इस अधिसूचना से किसानों को उच्च उपज और पोषण-संपन्न मक्का किस्म उपलब्ध होगी, जिससे पर्वतीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में पोषण सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और आय वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

(स्रोतः भाकृअनुप–विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा)

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