भाकृअनुप–केन्द्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक, ने चावल अनुसंधान श्रमिक संघ, कटक, के साथ मिलकर अपने कैंपस में राष्ट्रीय राइसटेक उद्योग नवाचार शिखर सम्मेलन (आरटीआईआईएस–2026) को सफलतापूर्वक आयोजित किया, जो चावल अनुसंधान एवं उद्योग के बीच मजबूत संबंध बनाने में एक अहम मील का पत्थर साबित हुआ।
इस समिट का थीम था ‘चावल विज्ञान को विस्तार योग्य औद्योगिक समाधानों में रूपांतरित करना’, जिसे आईपी एवं टीएम यूनिट, भाकृअनुप, नई दिल्ली, ने स्पॉन्सर किया था, और इसमें देश भर के हितधारक ने जोश के साथ हिस्सा लिया।

मुख्य अतिथि, संपद चंद्र स्वैन, उद्योग, क्षमता निर्माण एवं तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), ओडिशा सरकार, ने वैज्ञानिक नवाचार को व्यवहारिक, किसान-हितैषी समाधान में बदलने के लिए अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच ज़्यादा मिलकर काम करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने ओडिशा में खेती के विकास को आगे बढ़ाने में भाकृअनुप-सीआरआरआई की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया और राज्य सरकार से लगातार मदद का भरोसा दिया।
प्रकाश चंद्र सेठी, विधान परिषद सदस्य (कटक सदर), और डॉ. नीरू भूषण, सहायक महानिदेशक (आईपी एवं टीएम), भाकृअनुप, विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता जी.ए.के. कुमार, निदेशक, भाकृअनुप-सीआरआरआई, कटक, ने की।
प्रकाश चंद्र सेठी, इंजीनियर, ने कृषि-उद्योग इकोसिस्टम को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने तथा गांवों में रोज़ी-रोटी को बढ़ावा देने के लिए नवाचार, क्षमता निर्माण एवं उद्यमिता की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
डॉ. नीरू भूषण ने वैज्ञानिक नवाचार को बाजार-उन्मुख, किसान-केंद्रित तकनीकी में बदलने के लिए असरदार बौद्धिक संपदा प्रबंधन तथा उद्योग–अनुसंधान के मजबूत संबंध के महत्व पर ज़ोर दिया।
तकनीकी बातचीत मुख्य थीम वाले एरिया पर आधारित थी, जिसमें जलवायु-अनुकूल चावल की किस्में, जिसमें सहनशील धान की किस्में, संसाधन-कुशल उत्पादन प्रणालियाँ, स्मार्ट यंत्रीकरण, बाजार उन्मुख प्रसंस्करण, डिजिटल विस्तार सेवाएँ तथा संकर धान और अपोमिक्सिस शामिल हैं। इन सत्र ने तकनीकी अपनाने में तेजी लाने और उद्योग के समावेशीकरण को मजबूत करने पर गहरी चर्चा के लिए केन्द्रित मंच प्रदान किया।

आरटीआईआईएस–2026 नवाचार एवं साझेदार के लिए एक प्रभावी मंच के तौर पर उभरा, जिसने देश भर के जाने-माने वैज्ञानिक, उद्योग से जुड़े लीडर, कृषि-तकनीकी से जुड़े उद्यम, नव-उद्यम, नीति निर्माता तथा विकास एजेंसियों को एक साथ लाया। खास बातों में तकनीकी प्रदर्शन, B2B संवादात्मक बैठक, एमएयू पर हस्ताक्षर करने के साथ-साथ भविष्य की नीति पर एक रणनीतिक बातचीत शामिल थी।
250 से ज़्यादा डेलीगेट्स के शामिल होने के साथ, यह समिट सहयोग और तरक्की की एक मिसाल के तौर पर खड़ा हुआ, जिसने भारत के चावल क्षेत्र को टिकाऊ रूप से खुशहाल तथा बढ़ी हुई ग्लोबल प्रतिस्पर्धा की ओर ले जाने के भाकृअनुप-सीआरआरआई के कमिटमेंट को पक्का किया।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक)







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