भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई, मोतिहारी, बिहार में खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों ने सीखी जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियां

भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई, मोतिहारी, बिहार में खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों ने सीखी जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियां

14 जून, 2026, मोतिहारी, बिहार

भाकृअनुप–महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान (एमजीआईएफआरआई), मोतिहारी, ने आज बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के बनजरिया प्रखंड के सिसवा गांव में राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान 2026 के अंतर्गत एक जागरूकता-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष रूप से जलभराव, बाढ़-प्रभावित एवं मृदा क्षरण वाले क्षेत्रों में किसानों के बीच वैज्ञानिक, संसाधन-कुशल एवं मृदा स्वास्थ्य-केंद्रित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम का मुख्य संदेश वैज्ञानिक पोषक तत्व एवं फसल प्रबंधन के माध्यम से उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के महत्व पर केंद्रित था।

कार्यक्रम में सतत मृदा एवं फसल प्रबंधन पद्धतियों पर जोर दिया गया, जिनमें मृदा परीक्षण आधारित एवं संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक आदानों का समावेशन, हरी खाद, जैव उर्वरकों तथा एजोला के उपयोग द्वारा मृदा स्वास्थ्य एवं फसल उत्पादकता में सुधार शामिल था। किसानों को लागत कम करने एवं जल संरक्षण के लिए शून्य जुताई (Zero Tillage) तथा प्रत्यक्ष बीजित धान (Direct-Seeded Rice) जैसी संरक्षण कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम में यंत्रीकरण आधारित समाधानों, उपयुक्त जुताई पद्धतियों तथा रोटावेटर के अत्यधिक उपयोग से होने वाले जोखिमों पर भी प्रकाश डाला गया। इसके अतिरिक्त किसानों को जलभराव एवं बाढ़ की समस्याओं से निपटने तथा फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए खेत की मेड़ों को मजबूत करने, भूमि समतलीकरण में सुधार करने तथा प्रभावी जल निकासी एवं जल प्रबंधन पद्धतियां अपनाने की सलाह दी गई।

Farmers learn climate-smart farming practices under Khet Bachao Abhiyan at ICAR-MGIFRI, Motihari, Bihar

कार्यक्रम में गांव के मुखिया, कृषि समन्वयक, एटीएम, बीटीएम तथा प्रगतिशील किसानों ने सक्रिय भागीदारी की। प्रतिभागियों ने उर्वरक उपयोग, मृदा क्षरण, जलभराव, जुताई पद्धतियों तथा फसल स्थापना से संबंधित चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की। वैज्ञानिकों ने संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा संरक्षण तथा उपयुक्त कृषि यंत्रीकरण के माध्यम से इन समस्याओं के समाधान हेतु व्यावहारिक एवं स्थान-विशिष्ट सुझाव प्रदान किए।

कार्यक्रम का समापन इस सशक्त संदेश के साथ हुआ कि स्वस्थ मृदा ही उत्पादक, लाभकारी एवं जलवायु-अनुकूल कृषि की आधारशिला है। भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई ने खेत बचाओ अभियान के व्यापक उद्देश्यों के अंतर्गत वैज्ञानिक परामर्श, खेत प्रदर्शनियों तथा सतत कृषि प्रौद्योगिकियों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।

कार्यक्रम में किसानों, ग्राम प्रतिनिधियों तथा क्षेत्रीय कृषि कार्यकर्ताओं सहित कुल 42 प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी, बिहार)

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