भाकृअनुप-एनआरआईआईपीएम प्रायोजित प्रोजेक्ट ने मदुरै में गुंडू मल्लिगई (जैस्मिन) के टिकाऊ उत्पादन हेतु आईपीएम मापदंड का किया लोकार्पण

भाकृअनुप-एनआरआईआईपीएम प्रायोजित प्रोजेक्ट ने मदुरै में गुंडू मल्लिगई (जैस्मिन) के टिकाऊ उत्पादन हेतु आईपीएम मापदंड का किया लोकार्पण

भाकृअनुप-राष्ट्रीय समेकित कीट प्रबंधन अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली, का प्रायोजित प्रोजेक्ट “गुंडू मल्लिगई (जैस्मिन, जैस्मिनमसंबैक) के टिकाऊ उत्पादन के लिए समेकित कीट प्रबंधन (आपीएम) मॉड्यूल का विकास” अगस्त 2025 से मार्च 2028 तक के लिए कृषि कीटविज्ञान विभाग, कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंदान केन्द्र, मदुरै, में चल रहा है। यह डॉ. रमन थंगावेलु, परयोजना निदेशक, निदेशक, भाकृअनुप-एनआरआईआईपीएम, नई दिल्ली, और डॉ. एम. शांति, परयोजना समन्वयक, पादप संरक्षण अध्ययन केन्द्र, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कोयंबटूर, की देखरेख में मदुरै जिले के बागवानी प्रभाग के सहयोग से किया जाएगा।

ICAR-NRIIPM Sponsored Project Launches IPM Module for Sustainable Gundu Malligai (Jasmine) Production in Madurai

परियोजना का मुख्य उद्देश्य है जैस्मिन के जरूरी कीड़ों के खिलाफ समेकित कीट प्रबंधन मॉड्यूल को विकसित, प्रमाणित तथा बेहतर करना था साथ ही जैविक नियंत्रण एजेंट (स्यूडोमोनास, बैसिलस, ट्राइकोडर्मा), फायदेमंद माइक्रोब्स (एज़ोस्पिरिलम, फॉस्फोबैक्टीरिया, वीएएम, पोटाश सॉल्युबिलाइजिंग बैक्टीरिया, जिंक सॉल्युबलाइजिंग बैक्टीरिया, सिलिका सॉल्युबलाइजिंग बैक्टीरिया), बोटैनिकल्स (नीम ऑयल 1000 ppm) और पर्यावरण हितैषी कीटनाशक को शामिल करके बड़े एरिया में आपीएम मॉड्यूल को बढ़ावा देना है।

इस परियोजना के तहत, दो गांवों, यानी एलियारपथी (तिरुपारामकुनराम ब्लॉक) और नक्कलपट्टी (उसिलमपट्टी ब्लॉक) में 40 अग्रणी जैविक रूप से जैस्मिन उगाने वाले किसान की पहचान की गई, ताकि 20 एकड़ (हर किसान के लिए 0.5 एकड़) क्षेत्र में आईपीएम प्रदर्शन लगाया जा सके। इन किसानों को अलग-अलग जैव नियंत्रण एजेंट, फायदेमंद माइक्रोब्स, बोटैनिकल्स के बारे में बताया गया साथ ही जब कीड़ों की आबादी आर्थिक आर्थिक सीमा (ईटीएल) स्तर तक पहुंच जाए, तो ज़रूरत के हिसाब से जैव नियंत्रक (कीटनाशक) के इस्तेमाल की हेतु वास्तविक प्रशिक्षण दिया गया।

साल 2025-26 के दौरान आपीएम प्रदर्शन करने के लिए ज़रूरी सभी इनपुट एनआरआईआईपीएम, नई दिल्ली, टीएनएयू, कोयंबटूर, और कीटनाशक कंपनियों से खरीदे गए और उन्हें दोनों गांवों के जैस्मिन किसानों को बांटा गया। इस प्रोजेक्ट में तैनात तकनीकी सहायक, टीएनएयू तथा एनआरआईआईपीएम, नई दिल्ली, के प्रधान निरीक्षक की देखरेख में मिट्टी की स्वास्थ्य, पौधों का स्वास्थ्य एवं कीड़े-मकोड़ों तथा बीमारियों पर निगरानी कर रहे हैं।

(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय समेकित कीट प्रबंधन अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)

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