1 फरवरी, 2026, हिसार, हरियाणा
भाकृअनुप–केन्द्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान, हिसार, हरियाणा ने 1 फरवरी, 2026 को किसान-वैज्ञानिक-उद्योग बैठक का आयोजन करके अपना 42वां स्थापना दिवस मनाया, जो भारत में भैंस अनुसंधान और विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में संस्थान के लगातार प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. (डॉ.) कर्नल अजय कुमार गहलोत, पूर्व कुलपति, राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (आरएजेयूवीएएस), बीकानेर, ने किया, जो मुख्य अतिथि के रूप में इस अवसर पर उपस्थित थे।

डॉ. प्रवीण मलिक, सीईओ, एग्रीइनोवेट इंडिया और पूर्व पशुपालन आयुक्त, भारत सरकार, और डॉ. नरेश जिंदल, निदेशक, अनुसंधान, लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (एलयूवीएएस), हिसार, इस कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल हुए।
इस बैठक में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के प्रगतिशील किसानों के साथ-साथ डेयरी उद्योग एवं विकास संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस कार्यक्रम ने किसानों, वैज्ञानिकों और उद्योग हितधारकों के बीच बातचीत तथा विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया। किसानों ने अपने अनुभव, चुनौतियों और सफलता की कहानियाँ साझा की, और भैंसों की उत्पादकता एवं लाभप्रदता बढ़ाने के लिए व्यावहारिक, किफायती और क्षेत्र के लिए तैयार तकनीकों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उनके योगदान को मान्यता देते हुए, संस्थान ने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया, जो वैज्ञानिकों और किसान समुदाय के बीच मजबूत एवं स्थायी बंधन का प्रतीक है।
उद्योग विशेषज्ञों ने दुग्ध उत्पादन प्रौद्योगिकियों, पोषण और पशु स्वास्थ्य प्रबंधन में हालिया प्रगति पर प्रकाश डाला, तथा भैंस पालन में दक्षता एवं स्थिरता में सुधार में उनकी भूमिका को रेखांकित किया।

विशिष्ट अतिथियों ने इस बात पर जोर दिया कि भैंस पालन का भविष्य स्मार्ट सेंसर, सटीक पशुधन खेती उपकरणों और जीनोमिक चयन को अपनाने में निहित है, जो उत्पादन दक्षता में काफी वृद्धि कर सकता है। इस संदर्भ में, डिजिटल प्रौद्योगिकियों, जीनोमिक उपकरणों तथा डेटा-संचालित प्रबंधन प्रणालियों को विकसित करने और एकीकृत करने के लिए संस्थान की चल रही पहलों पर प्रकाश डाला गया। इन नवाचारों से पशु स्वास्थ्य, प्रजनन और भोजन व्यवहार की वास्तविक समय की निगरानी संभव होने की उम्मीद है, जिससे अधिक कुशल और टिकाऊ भैंस उत्पादन प्रणालियाँ बनेंगी।
कार्यक्रम का समापन किसानों, वैज्ञानिकों और उद्योग भागीदारों द्वारा भारत में भैंस पालन के वैज्ञानिक, टिकाऊ तथा किसान-केन्द्रित विकास की दिशा में मिलकर काम करने की नई प्रतिबद्धता के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में कुल 120 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान, हिसार, हरियाणा)







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