जल से उड़ान तक: एक्वा कॉप्टर नवाचार से मत्स्य परिवहन में क्रांतिकारी बदलाव

जल से उड़ान तक: एक्वा कॉप्टर नवाचार से मत्स्य परिवहन में क्रांतिकारी बदलाव

11–13 अप्रैल, 2026, बैरकपुर

रायसेन में आयोजित प्रतिष्ठित उन्नत कृषि महोत्सव 2026 में भारत के मत्स्य क्षेत्र की एक उल्लेखनीय उपलब्धि प्रमुख आकर्षण के रूप में उभरकर सामने आई। एक्वा कॉप्टर नामक भारी भार-वहन क्षमता वाला मछली परिवहन ड्रोन अपनी अनूठी क्षमता के कारण व्यापक चर्चा का केन्द्र बना, जो दूरस्थ मछली पकड़ने वाले स्थानों से सीधे बाजारों तक मछलियों के परिवहन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सिफरी), द्वारा विकसित यह एक्वा कॉप्टर अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण चुनौती का समाधान प्रस्तुत करता है। भारत में अनेक मत्स्य अवतरण केन्द्र भौगोलिक रूप से अलग-थलग डेल्टा क्षेत्रों और बड़े जलाशयों में स्थित हैं, जहाँ परिवहन धीमा, श्रमसाध्य तथा गुणवत्ता हानि की समस्या से प्रभावित रहता है।

From Waters to Wings: Transforming Fish Transport through Aquacopter Innovation

महोत्सव के दौरान किए गए इसके लाइव प्रदर्शन ने किसानों, नीति-निर्माताओं एवं वैज्ञानिक नेतृत्व का विशेष ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम का उद्घाटन केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किया, उन्होंने प्रदर्शनी स्थल का अवलोकन कर इस नवाचार की सराहना की। इस पहल को डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, डीएआरई एवं महानिदेशक, भाकृअनुप, सहित राष्ट्रीय विज्ञान नेतृत्व ने भी महत्वपूर्ण माना।

डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, ने कहा कि एक्वा कॉप्टर केवल एक तकनीकी विकास नहीं, बल्कि ब्लू इकोनॉमी के लिए एक परिवर्तनकारी साधन है। यह दूरस्थ जल क्षेत्रों से बाजारों तक तेज और कम तनावपूर्ण परिवहन सुनिश्चित कर मछली पकड़ने के उपरांत उसकी क्षति को कम करता है, मछलियों की गुणवत्ता बनाए रखता है तथा किसानों की आय बढ़ाता है, जिससे सतत एवं भविष्य उन्मुख मत्स्य पारितंत्र को मजबूती मिलती है।

यह ड्रोन 70 किलोग्राम तक भार वहन क्षमता तथा लगभग 5 किलोमीटर परिचालन सीमा से युक्त है, जो मत्स्य परिवहन की लॉजिस्टिक चुनौतियों को प्रभावी ढंग से दूर करता है। न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ एक बिंदु से दुसरे बिंदु तक डिलीवरी करने तथा नियोजित बैटरी ठहराव के साथ संचालन की इसकी क्षमता स्मार्ट एक्वाकल्चर लॉजिस्टिक्स की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह पहल मत्स्य पालन विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के सहयोग से संचालित की जा रही है।

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देशभर से हजारों किसानों की उपस्थिति वाले इस महोत्सव ने ऐसे नवाचारों के प्रदर्शन के साथ-साथ इसे अपनाने को बढ़ावा देने हेतु एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। प्रतिभागियों ने देखा कि ड्रोन आधारित परिवहन से तेज डिलीवरी, कटाई उपरांत होने वाली छती, उत्पाद गुणवत्ता संरक्षण तथा बेहतर बाजार मूल्य प्राप्ति संभव है।

यह पायलट पहल केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि दूरस्थ मत्स्य पालक समुदायों के लिए एक जीवन रेखा सिद्ध हो सकती है, क्योंकि यह बाजारों तक उनकी पहुँच मजबूत कर आजीविका में सुधार करती है। जीवित मछलियों के परिवहन में देरी और अनावश्यक तनाव को कम कर यह ताजगी और उच्च मूल्य सुनिश्चित करती है।

जैसे-जैसे भारत तकनीक-सक्षम एवं सतत कृषि भविष्य की ओर अग्रसर है, एक्वा कॉप्टर जैसे नवाचार महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। उन्नत कृषि महोत्सव 2026 में इसकी सफलता इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब वैज्ञानिक नवाचार को जमीनी चुनौतियों से जोड़ा जाता है, तो वह विभिन्न क्षेत्रों में सार्थक परिवर्तन ला सकता है।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)

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