केवीके री भोई ने प्रशिक्षण एवं मत्स्य अंगुलिकाओं के वितरण के साथ 26वां राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस 2026 मनाया

केवीके री भोई ने प्रशिक्षण एवं मत्स्य अंगुलिकाओं के वितरण के साथ 26वां राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस 2026 मनाया

10 जुलाई, 2026, मेघालय

कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), री भोई, भाकृअनुप अनुसंधान परिसर, पूर्वोत्तर पर्वतीय (एनईएच) क्षेत्र, उमियाम ने "कार्प पालन में रोग प्रबंधन" विषय पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर तथा री भोई जिले के मत्स्य किसानों को गुणवत्तायुक्त मत्स्य अंगुलिकाओं (फिंगरलिंग्स) का वितरण कर 26वां राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस 2026 मनाया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य मत्स्य किसानों को संवर्धित कार्प मछलियों में होने वाले सामान्य रोगों की रोकथाम, पहचान तथा प्रबंधन संबंधी ज्ञान एवं कौशल प्रदान करना था, ताकि स्वस्थ मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिले और मत्स्य फार्मों की उत्पादकता में वृद्धि हो। तकनीकी सत्र के दौरान प्रतिभागियों को तालाब जैव-सुरक्षा, जल गुणवत्ता प्रबंधन, रोगों के लक्षण, निवारक स्वास्थ्य प्रबंधन तथा सतत जलीय कृषि के लिए सर्वोत्तम प्रबंधन पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने अधिक मत्स्य जीवितता तथा किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक मत्स्य पालन पद्धतियों को अपनाने, तालाब के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी तथा समय पर रोग प्रबंधन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को केवीके तथा अन्य संबंधित विभागों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे तकनीकी सहयोग का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। समारोह के अंतर्गत जिले में वैज्ञानिक मत्स्य पालन को बढ़ावा देने तथा मत्स्य उत्पादन में वृद्धि के उद्देश्य से सहभागी किसानों को गुणवत्तायुक्त मत्स्य अंगुलिकाओं का वितरण किया गया।

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कार्यक्रम का समन्वयन केवीके री भोई के विषय विशेषज्ञ (मत्स्य) श्री बैंकिटकुपार मुखिम ने किया। उन्होंने कार्प पालन में रोग प्रबंधन पर तकनीकी सत्र का संचालन किया तथा मत्स्य अंगुलिका वितरण कार्यक्रम का भी संचालन किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि निवारक स्वास्थ्य प्रबंधन, तालाब की स्वच्छता तथा जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी रोग प्रकोप को न्यूनतम करने और लाभकारी मत्स्य पालन प्राप्त करने की कुंजी हैं। उन्होंने पशुधन एवं मत्स्य उत्पादन में वृद्धि के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली तथा उचित पोषण प्रबंधन के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जिससे ग्रामीण परिवारों की आजीविका के अवसर सुदृढ़ होते हैं।

कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ, जिसमें किसानों ने अपने अनुभव साझा किए तथा विशेषज्ञों से क्षेत्रीय स्तर की समस्याओं के व्यावहारिक समाधान प्राप्त किए।

इस कार्यक्रम में री भोई जिले के विभिन्न गांवों से आए कुल 15 मत्स्य किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा रोग प्रबंधन एवं सतत जलीय कृषि पद्धतियों के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों के साथ संवाद किया।

(स्रोत: भाकृअनुप अनुसंधान परिसर, पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र, उमियाम, मेघालय)

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