3 जनवरी, 2026, हैदराबाद
पोषण सुरक्षा को मजबूत करने और स्थायी खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भाकृअनुप-भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, ने श्री अन्न आधारित पोषण पहलों को बढ़ावा देने के लिए हरे कृष्णा मूवमेंट चैरिटेबल फाउंडेशन, कोकापेट के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया।
इस सहयोग का उद्देश्य ज्ञान साझा करने, रेसिपी विकसित करने, प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से श्री अन्न आधारित खाद्य पहलों को बढ़ावा देना है। यह जुड़ाव एचकेएमसीएफ के बड़े पैमाने पर खाद्य सेवा एवं कल्याण कार्यक्रमों के व्यापक अनुभव को भाकृअनुप-आईआईएमआर की बाजरा अनुसंधान, पोषण एवं मूल्य संवर्धन में विशेषज्ञता के साथ लाता है, जो स्वस्थ और स्थायी आहार प्रथाओं के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।

वर्तमान में एचकेएमसीएफ विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मिलकर इंदिराम्मा कैंटीन और भोजनमृत (तेलंगाना), अन्ना कैंटीन (आंध्र प्रदेश) जैसे प्रमुख सार्वजनिक भोजन कार्यक्रमों को लागू कर रहा है और कुल मिलाकर हर दिन लगभग 2.5 लाख लोगों को भोजन कराता है।
एमओयू पर हस्ताक्षर समारोह हरे कृष्णा चैरिटेबल फाउंडेशन (एचकेएमसीएफ) कोकापेट में आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. सी. तारा सत्यवती, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईएमआर, हैदराबाद, की गरिमामयी उपस्थिति थी और इसकी अध्यक्षता श्री सत्य गौरा चंद्र दास प्रभुजी, एम. टेक (आईआईटी, मद्रास) अध्यक्ष, हरे कृष्णा मूवमेंट चैरिटेबल फाउंडेशन, और क्षेत्रीय अध्यक्ष, अक्षय पात्र फाउंडेशन, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश और भाकृअनुप-आईआईएमआर और एचकेएमसीएफ के अन्य पदाधिकारियों ने की।
इस अवसर पर बोलते हुए, डॉ. सी. तारा सत्यवती, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईएमआर ने इस बात पर जोर दिया कि यह साझेदारी वैज्ञानिक अनुसंधान, जागरूकता और क्षमता निर्माण के माध्यम से बाजरा को मुख्यधारा में लाने के संस्थान के मिशन के अनुरूप है, और विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग सार्वजनिक पोषण पहलों में सार्थक योगदान देगा।

इस मौके पर, हरे कृष्णा मूवमेंट चैरिटेबल फाउंडेशन, हैदराबाद के प्रेसिडेंट और अक्षय पात्र फाउंडेशन (तेलंगाना और एपी) के रीजनल प्रेसिडेंट, हिज ग्रेस श्री सत्य गौरा चंद्र दास प्रभुजी ने कहा: “हमें भाकृअनुप-आईआईएमआर, हैदराबाद, के साथ मिलकर श्री अन्न आधारित पोषण को बढ़ावा देने में खुशी हो रही है। श्री अन्न न सिर्फ भारत की पारंपरिक खाने की संस्कृति का एक अहम हिस्सा है, बल्कि यह आज की स्वास्थ्य, सस्टेनेबिलिटी एवं खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए भी बहुत ज़रूरी है। यह सहयोग हमें समाज के बड़े फायदे के लिए अपने फूड प्रोग्राम में श्री अन्न को शामिल करने के नए तरीके खोजने में मदद करेगा।”
यह एमओयू पोषण, सस्टेनेबिलिटी तथा सामुदायिक कल्याण को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह सहयोग इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स 2023 की विरासत और भारत की रिसर्च और पॉलिसी फोकस को व्यावहारिक, समुदाय-उन्मुख परिणामों में बदलने की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है।
(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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