21 अगस्त 2026, राजस्थान
डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने 18–20 अगस्त, 2026 तक राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई), दुर्गापुरा, जयपुर में श्री करण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जॉबनेर और भाकृअनुप–भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 65वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता बैठक का उद्घाटन किया।
उद्घाटन सत्र के दौरान डॉ. एम.एल. जाट को भारत में गेहूं अनुसंधान, कृषि विज्ञान और नवाचार में उनके असाधारण तथा निरंतर योगदान के लिए प्रतिष्ठित श्री वी.एस. माथुर स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार गेहूं अनुसंधान तथा कृषि विकास की प्रगति में अपने विशिष्ट और आजीवन योगदान के लिए प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को प्रदान किया जाता है।

इस कार्यक्रम में डॉ. डी.के. यादव, उप-महानिदेशक (फसल विज्ञान), भाकृअनुप; प्रो. (डॉ.) पुष्पेंद्र सिंह चौहान, कुलपति, एसकेएनएयू, जॉबनेर; डॉ. पूनम जसरोटिया, सहायक महानिदेशक (पौध संरक्षण), भाकृअनुप; डॉ. रतन तिवारी, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईडब्ल्यूबीआर, करनाल; और डॉ. उम्मेद सिंह, निदेशक अनुसंधान, एसकेएनएयू, जॉबनेर सहित अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. जाट ने भारतीय कृषि में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए गेहूं और जौ पर अनुसंधान को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने राजस्थान में विभिन्न फसलों के लिए नए अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी) केन्द्रों की स्थापना के साथ-साथ मौजूदा केन्द्रों को मजबूत करने की घोषणा की। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ उत्पादकता बढ़ाने के लिए विज्ञान-आधारित, टिकाऊ और संसाधन-कुशल कृषि प्रणालियों के विकास के महत्व पर जोर दिया।
इस पहल के तहत डॉ. जाट ने राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा में जौ (एनडब्ल्यूपीजेड) पर एक जोनल समन्वय इकाई की स्थापना की घोषणा की। इस इकाई से क्षेत्र में जौ अनुसंधान, समन्वय और तकनीकी गतिविधियों को अधिक गति मिलने की उम्मीद है।

डॉ. डी.के. यादव ने गेहूं और जौ के लिए प्रमुख अनुसंधान प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला, जिनमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना, मिट्टी की बढ़ती क्षारीयता, दोहरे उद्देश्य वाली जौ की किस्मों का विकास, जैविक उत्पादन प्रणालियों को बढ़ावा देना और जैव-सुदृढ़ीकृत किस्मों का विकास शामिल है। उन्होंने अनुसंधान कार्यक्रमों को उभरती कृषि चुनौतियों और किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रो. (डॉ.) पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने एसकेएनएयू, जॉबनेर की अनुसंधान उपलब्धियों को प्रस्तुत किया और विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उन्नत फसल किस्मों पर प्रकाश डाला। डॉ. पूनम जसरोटिया ने अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास में तेजी लाने के लिए गेहूं और जौ पर एआईसीआरपी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न अनुसंधान केन्द्रों की टीमों को उन्नत गेहूं और जौ की किस्मों के विकास में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। तकनीकी और प्रायोगिक पुस्तिकाएं भी जारी की गईं। अखिल भारतीय समन्वित गेहूं एवं जौ अनुसंधान परियोजना के तहत सर्वश्रेष्ठ केंद्र पुरस्कार जूनागढ़ और अकोला केंद्रों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किए गए।
तीन दिवसीय बैठक में देशभर के गेहूं और जौ अनुसंधान केंद्रों के वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया और फसल उत्पादकता एवं गुणवत्ता बढ़ाने, जलवायु-लचीली किस्मों के विकास, मृदा एवं जल संसाधनों के संरक्षण तथा विकसित भारत 2047 की दिशा में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। सीआईएमएमवाईटी, मेक्सिको और जेआईआरसीएएस, जापान, के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भी विचार-विमर्श में भाग लिया।

बैठक का एक प्रमुख परिणाम 26 उन्नत किस्मों—15 गेहूं और 11 जौ—की पहचान रही, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जारी करने के लिए आगे विचार किया जाएगा। इन किस्मों में अधिक उत्पादकता, बेहतर गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल बेहतर क्षमता जैसे आशाजनक गुण हैं।
कार्यक्रम में डॉ. विमला दूदवाल, कुलपति, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा; डॉ. त्रिभुवन शर्मा, कुलपति, राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर; डॉ. सुरेंद्र सिंह, निदेशक, राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा; साथ ही देशभर के गेहूं एवं जौ अनुसंधान केंद्रों के डीन, निदेशक, वैज्ञानिक और प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
“एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत, गणमान्य व्यक्तियों ने डॉ. सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में संस्थान परिसर में आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिया।
डॉ. उम्मेद सिंह, निदेशक अनुसंधान, एसकेएनएयू, जॉबनेर, ने बैठक के सफल आयोजन में बहुमूल्य योगदान के लिए मुख्य अतिथि, विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों, वैज्ञानिकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल)







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