अखिल भारतीय समन्वित पुष्पकृषि अनुसंधान परियोजना, पुणे ने खेत बचाओ अभियान तथा खरीफ योजना कार्यक्रम का किया आयोजन

अखिल भारतीय समन्वित पुष्पकृषि अनुसंधान परियोजना, पुणे ने खेत बचाओ अभियान तथा खरीफ योजना कार्यक्रम का किया आयोजन

18 जून, 2026, पुणे

अखिल भारतीय समन्वित पुष्पकृषि अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी ऑन फ्लोरीकल्चर), गणेशखिंड, पुणे, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र (जेडएआरएस), गणेशखिंड, पुणे, महाराष्ट्र सरकार के कृषि विभाग तथा कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), बारामती के वैज्ञानिकों द्वारा 18 जून, 2026 को वाल्हे, तहसील पुरंदर, जिला पुणे में संयुक्त रूप से खेत बचाओ अभियान और खरीफ योजना कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए, डॉ. डी. बी. लाड, सह अनुसंधान निदेशक, जेडएआरएस, गणेशखिंड, पुणे, ने सतत कृषि उत्पादन के लिए मृदा परीक्षण, हरी खाद, फसल चक्र, जैविक खेती और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने किसानों को मृदा स्वास्थ्य में सुधार, फसल उत्पादकता बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए इन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

एक विशेषज्ञ सत्र में पुष्पकृषि की संभावनाओं और आर्थिक क्षमता पर प्रकाश डाला गया तथा किसानों को स्थानीय परिस्थितियों और बाजार की मांग के आधार पर उपयुक्त पुष्प फसलों के चयन और खरीफ 2026 मौसम की योजना बनाने के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया गया। उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक खेती पद्धतियों को अपनाने के महत्व पर भी बल दिया गया।

ICAR-DFR, Pune Organises Khet Bachao Abhiyan and Kharif Planning Programme

कृषि पर एल नीनो के संभावित प्रभाव पर एक जानकारीपूर्ण व्याख्यान दिया गया, जिसमें वर्षा के स्वरूप और फसल उत्पादन पर इसके संभावित प्रभावों की व्याख्या की गई। किसानों को मौसम संबंधी जोखिमों को कम करने और लचीलापन बढ़ाने के लिए उपयुक्त प्रबंधन रणनीतियों की जानकारी दी गई।

प्रतिभागियों को किसानों के लिए उपलब्ध विभिन्न सरकारी योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों के बारे में भी जानकारी दी गई तथा कृषि और आर्थिक विकास के लिए इन पहलों का पूर्ण लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक चर्चा सत्र के साथ हुआ, जिसमें किसानों ने फसल योजना, मृदा उर्वरता प्रबंधन, पुष्पकृषि, जलवायु लचीलापन और सरकारी सहायता योजनाओं से संबंधित प्रश्न पूछे। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के मार्गदर्शन की सराहना की और आगामी खरीफ मौसम के दौरान मृदा स्वास्थ्य में सुधार, रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को कम करने और सतत कृषि उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए अनुशंसित वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपनी इच्छा व्यक्त की।

इस कार्यक्रम में 82 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 67 पुरुष और 15 महिलाएं शामिल थीं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) को बढ़ावा देना तथा किसानों के बीच वैज्ञानिक फसल प्रबंधन पद्धतियों और आगामी खरीफ मौसम के लिए प्रभावी योजना के संबंध में जागरूकता उत्पन्न करना था।

(स्रोत: भाकृअनुप-फ्लोरीकल्चरल अनुसंधान निदेशालय, पुणे)

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