अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में सतत कृषि और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एफपीओ और एसएचजी को किया गया प्रोत्साहित

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में सतत कृषि और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एफपीओ और एसएचजी को किया गया प्रोत्साहित

11 जून, 2026, श्री विजय पुरम

राष्ट्रव्यापी "खेत बचाओ अभियान" के अंतर्गत भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीआईएआरआई), श्री विजय पुरम द्वारा आज उर्वरकों के संतुलित उपयोग विषय पर एफपीओ, एसएचजी एवं प्रगतिशील किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दक्षिण अंडमान जिले के स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) तथा प्रगतिशील किसानों के लिए आयोजित किया गया।

भाकृअनुप-सीआईएआरआई तथा केवीके दक्षिण अंडमान के वैज्ञानिकों एवं नाबार्ड के अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और सतत कृषि पद्धतियों, मृदा स्वास्थ्य में सुधार हेतु उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने पर चर्चा की। प्रतिभागियों को कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं अवसरों की भी जानकारी दी गई, जिनका उद्देश्य अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में कृषि लाभप्रदता बढ़ाना और ग्रामीण आजीविकाओं को सुदृढ़ करना है।

संवाद के दौरान श्री आलोक नाथ पुष्पक, सहायक महाप्रबंधक, नाबार्ड, श्री विजय पुरम ने किसानों के बीच वित्तीय समावेशन, उद्यमिता और आजीविका विकास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) जैसे सामूहिक संस्थान संस्थागत ऋण, सरकारी योजनाओं तथा वित्तीय सहायता प्राप्त करने की बेहतर स्थिति में होते हैं।

उन्होंने किसानों को व्यापक सदस्यता आधार के साथ एक सशक्त किसान उत्पादक संगठन स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि उनकी सौदेबाजी क्षमता और बाजार तक पहुंच को बढ़ाया जा सके। श्री पुष्पक ने झींगा पालन और अन्य आय-सृजन गतिविधियों से संबंधित पहलों के समर्थन में नाबार्ड की गहरी रुचि से भी अवगत कराया तथा हितधारकों को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में जलवायु-सहिष्णु कृषि, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन तथा सतत आजीविका विकास पर केंद्रित परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया।

FPOs and SHGs Encouraged to Drive Sustainable Agriculture and Agri-Entrepreneurship in Andaman & Nicobar Islands

डॉ. जय सुंदर, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएआरआई, ने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से सामूहिक कार्रवाई के महत्व पर बल देते हुए कहा कि सामूहिक उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन से व्यक्तिगत प्रयासों की तुलना में अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से मसाला आधारित और मूल्य संवर्धित उद्यमों के लिए उत्पादक समूहों के गठन को प्रोत्साहित किया, ताकि उत्पादन दक्षता, बाजार पहुंच और लाभप्रदता को बढ़ाया जा सके।

डॉ. सुंदर ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के विशिष्ट उत्पादों, जैसे वर्जिन नारियल तेल, दालचीनी, केला, कटहल और टूना आधारित उत्पादों की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला, जिनकी बाजार में अत्यंत आशाजनक संभावनाएं हैं। उन्होंने इन उत्पादों के बाजार मूल्य को बढ़ाने के लिए उचित ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने उत्पादों के प्रचार-प्रसार और बाजार विस्तार के लिए ई-कॉमर्स पोर्टलों, व्हाट्सएप समूहों और सोशल मीडिया सहित डिजिटल प्लेटफार्मों के उपयोग की भी वकालत की। संगठित समूहों के माध्यम से बड़े पैमाने पर उत्पादन और सामूहिक विपणन किसानों और स्वयं सहायता समूहों को बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने और बेहतर प्रतिफल प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा। उन्होंने प्रतिभागियों को अपनी प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण संबंधी आवश्यकताओं को साझा करने के लिए भी प्रोत्साहित किया और आश्वासन दिया कि आईसीएआर-सीआईएआरआई और केवीके उनकी उद्यमशील गतिविधियों के समर्थन हेतु आवश्यकता-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कौशल विकास पहलों का आयोजन करेंगे।

कार्यक्रम में कुल 77 किसानों ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजय पुरम)

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