17 फरवरी, 2026, पश्चिम बंगाल
अंगूर तथा बागवानी फसलों में उत्पादकता बढ़ाने एवं एकीकृत फसल सुरक्षा के लिए आधूनिक खेती की मशीनरी और कृषि आदानों पर एक कार्यशाला पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के तलडांगरा में आयोजित की गई। इस प्रोग्राम में इलाके के किसानों और हितधारकों ने सक्रिय हिस्सा लिया और इसका मकसद अंगूर और दूसरी बागवानी फसलों में उत्पादकता को मजबूत करना और कीड़ों और बीमारियों का पूरी तरह से मैनेजमेंट करना था।

यह प्रोग्राम भाकृअनुप–राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान संस्थान, पुणे तथा डब्ल्यूबीसीएडीसी कृषि विज्ञान केन्द्र, सोनामुखी की एक मिली-जुली पहल थी, जिसे डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता, ने आसान बनाया।
डॉ. कौशिक बनर्जी, निदेशक, भाकृअनुप-एमआरसीजी, ने इलाके के लगभग 400 लाभार्थी, जिनमें लगभग 280 पुरुष तथा 120 महिला किसान शामिल थे, की कार्यकुशलता को बेहतर बनाने हेतु छोटे खेती के औजार, जैविक खाद, जैविक कीटनाशक, वर्मीकम्पोस्ट और दूसरे ज़रूरी इनपुट बांटे। यह मदद संस्थान के अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) फंड के तहत दी गई।
वरिष्ठ वैज्ञानिक ने जैविक-आधारित सघन रोग नियंत्रण उपाय पर व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र किए ताकि किसान टिकाऊ फसल सुरक्षा उपाय अपना सकें और बागवानी उत्पादन की व्यावसायिक व्यवहार्यता बढ़ा सकें।

इस कार्यशाला में पश्चिम बंगाल स्टेट कृषि विभाग और बिधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय के जाने-माने लोग शामिल हुए, उन्होंने इलाके में मशीनीकरण, बेहतर इनपुट इस्तेमाल तथा टिकाऊ बागवानी विकास को बढ़ावा देने के लिए मिलकर किए जा रहे प्रयासों पर जोर दिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान संस्थान, पुणे)







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