भाकृअनुप–आईआईएमआर, हैदराबाद कर्नाटक में वैज्ञानिक इनपुट प्रबंधन पर किसान जागरूकता अभियान का करेगा नेतृत्व

भाकृअनुप–आईआईएमआर, हैदराबाद कर्नाटक में वैज्ञानिक इनपुट प्रबंधन पर किसान जागरूकता अभियान का करेगा नेतृत्व

भाकृअनुप–भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-आईआईएमआर), हैदराबाद, आगामी सप्ताह में कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), कलबुर्गी के सहयोग से एक व्यापक किसान जागरूकता अभियान शुरू करने जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य किसानों के बीच विज्ञान आधारित पोषक तत्व एवं अन्य कृषि आदानों के प्रबंधन को बढ़ावा देना है।

अभियान के तहत वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मियों से युक्त चार बहु-विषयक दल गांव स्तर के कार्यक्रमों, खेत प्रदर्शनियों तथा संवादात्मक सत्रों के माध्यम से सीधे किसानों से संपर्क करेंगे। इसका उद्देश्य उन्नत कृषि तकनीकों का प्रभावी प्रसार और खेत स्तर पर उनका अपनाव सुनिश्चित करना है।

यह कार्यक्रम वैज्ञानिक एवं आवश्यकता आधारित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने पर केन्द्रित है, जिसमें विशेष जोर बाजरा आधारित खेती प्रणालियों पर दिया गया है। बाजरा शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है और जलवायु सहनशील फसल के रूप में पहचाना जाता है। मृदा परीक्षण और फसल विशेष आवश्यकताओं के आधार पर संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने से मृदा उर्वरता की बहाली, मिट्टी की संरचना में सुधार तथा सूक्ष्मजीव गतिविधियों में वृद्धि होगी, जिससे दीर्घकालिक कृषि स्थिरता को समर्थन मिलेगा।

ICAR–IIMR, Hyderabad to Lead Farmer Outreach Campaign on Scientific Input Management in Karnataka

संतुलित उर्वरीकरण से नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित होती है। इससे जड़ों का बेहतर विकास, सूखा सहनशीलता में वृद्धि, दाने की गुणवत्ता में सुधार तथा बाजरा एवं अन्य फसलों की उत्पादकता बढ़ती है।

इस पहल से अत्यधिक और अवैज्ञानिक उर्वरक उपयोग में कमी आने की संभावना है, जिससे खेती की लागत घटेगी और आदान उपयोग दक्षता बढ़ेगी। सटीक पोषक तत्व प्रबंधन से किसान अनावश्यक खर्च कम कर सकेंगे, पोषक तत्वों की हानि रोक सकेंगे और बेहतर उत्पादन व गुणवत्ता के माध्यम से अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे। यह विशेष रूप से बाजरा फसलों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी पौष्टिकता और बाजार मांग लगातार बढ़ रही है।

कार्यक्रम में जैव उर्वरकों, हरी खाद तथा जैविक आदानों के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इससे मृदा कार्बनिक कार्बन में वृद्धि, नमी संरक्षण में सुधार और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता में कमी आएगी, जिससे खेती अधिक किफायती और पर्यावरण अनुकूल बनेगी।

डॉ. सी. तारा सत्यवती, निदेशक, भाकृअनुप–आईआईएमआर, ने कहा कि संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना टिकाऊ और लचीली कृषि प्रणालियों को मजबूत करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बाजरा फसलों में वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन और उन्नत कृषि पद्धतियों का समन्वय उत्पादकता बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा किसानों की आय में वृद्धि करने में सहायक होगा।

यह कार्यक्रम देशभर के 100 गहन जिलों में चलाए जा रहे व्यापक राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा है, जहां वैज्ञानिक दल किसानों को जागरूक करने और सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने में सहयोग कर रहे हैं।

इस विशेष पहल के माध्यम से भाकृअनुप–आईआईएमआर का लक्ष्य मृदा स्वास्थ्य सुधारने, खेती की लागत घटाने तथा बाजरा आधारित एवं अन्य फसल प्रणालियों की उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाकर कृषि में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।

(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)

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